Jodhpur News: जोधपुर में प्रेम प्रसंग के चलते एक नाबालिग के मां बनने के मामले में पुलिस के द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद अदालत में हुई सुनवाई पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पोक्सो के मामले को रद्द किया है। कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वह किसी भी नाबालिग के साथ संबंध बनाने के लिए पक्षधर नहीं है और ना ही ऐसा करने की अनुमति देता है लेकिन यह भी सत्य है कि प्यार किसी भी कानून या सामाजिक नियमों को ध्यान में रखकर नहीं होता। बेकाबू भावनाओं और नासमझी से दो लोगों में प्यार हुआ और संबंध बने और और एक बच्चा पैदा हो गया जबकि दोनों में से एक नाबालिक है।

जोधपुर में 16 साल की लड़की के साथ रिलेशन बनाने और बच्चे को जन्म देने के बाद प्रेमी पर पॉक्सो का मामला दर्ज किया गया था । राजस्थान हाईकोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाते हुए प्रेमी पर लगे पॉक्सो केस को रद्द कर दिया। न्यायाधीश दिनेश मेहता ने कहा कि ऐसे मामलों में कोर्ट मूक दर्शक नहीं रह सकता । इसका सीधा प्रभाव दोनों के परिवार के साथ ही प्रेम प्रसंग के बाद उपजे बच्चे पर पड़ेगा । इन सभी को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज किया जाता है। इस मामले में न तो पीड़िता की तरफ से और ना ही उसके परिजनों की तरफ से पुलिस में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई गई । पूरा मामला पुलिस ने अपनी तरफ से ही दर्ज किया है। बाद में दोनों परिवार के बीच समझौता हो गया। लड़का व लड़की के माता पिता ने कोर्ट में उपस्थित होकर यह कहा कि वे केस नहीं चाहते ।इस मामले में प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ शादी करने को भी तैयार है । ऐसे में परिवार के लोग इस एफआईआर का निपटारा चाहते थे। दोनों पक्षों ने कोर्ट में नाबालिग और नवजात के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह एफआईआर निरस्त करने की अपील की थी ।

यह कुछ कहा कोर्ट ने

जज ने फैसला सुनाते हुए कहा- 16 साल की लड़की को 22 साल के युवक से प्रेम हो गया । दोनों की अपरिपक्वता क्षणिक नासमझी और हवस भरी भावनाएं सामाजिक , नैतिक व कानून पर भारी पड़ी । इस मामले में शिकायत पुलिस ने अपनी तरफ से दर्ज की न की लड़की या उसके परिजनों की तरफ से कोई शिकायत दर्ज कराई गई । लड़की ने पहले 161 व 164 के तहत दिए बयान के बाद कोर्ट के समक्ष भी स्वीकार किया कि उसने अपनी सहमति से याचिकाकर्ता के साथ संबंध बनाए और एक बच्चे का जन्म हुआ। लड़का व लड़की के माता - पिता अपने बच्चों की इस गलती को माफ कर लड़की के बालिग होने पर दोनों की शादी करने को तैयार है। यदि यह मामला आगे बढ़ता है तो तय है कि लड़के को कम से कम दस साल की सजा होगी । इसका सीधा प्रभाव लड़की व उसके नवजात पर पड़ेगा । इन सभी परिस्थितियों में याचिकाकर्ता के खिलाफ देवनगर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाना न्याय के हित में होगा ।

यह है पूरा मामला

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में 4 अगस्त को एक नाबालिक को पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती किया जाता है। जांच में उसके प्रेग्नेंट होने की जानकारी मिलती है जिसके कुछ समय बाद वह नाबालिग एक बेटे को जन्म देती है। घटना के संज्ञान में आने पर पुलिस भी पहुंचती है और हॉस्पिटल में नाबालिग के बयान दर्ज करती है। नाबालिग के बयान के आधार पर देव नगर थाना अधिकारी की ओर से पॉक्सो एक्ट में रेप का मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की । पुलिस के बयानों में भी दोनों पक्षों की ओर से आपसी सहमति से संबंध बनाए जाने की बात कही गई थी।

Posted By: Kushagra Valuskar

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