मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान सहित पूरे देश में आज वैसे तो संविधान दिवस मनाया गया, लेकिन संयोग से इसी दिन राजस्थान में निकाय अध्यक्षों के चुनाव भी हुए और ज्यादा से ज्यादा बोर्ड अपने कब्जे में करने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनो ने ही जम कर जोड़-तोड़ की। शह और मात के इस खेल में भाजपा हालाकि कुछ पीछे रही, लेकिन जहां दांव लगा वहां कोशिश इसने भी नहीं छोड़ी। छबडा नगरीय निकाय में कांग्रेस के पास भाजपा से लगभग दोगुने पार्षद थे, लेकिन अध्यक्ष भाजपा का बना। हालांकि यहां लाॅटरी से फैसला करना पडा, क्योंकि दोनों दलों को बराबर वोट मिले थे। नसीराबाद में कांग्रेस का बोर्ड बना, लेकिन यहां भी लाॅटरी से फैसला हुआ। भाजपा के लिए संतोष की बात यह रही कि पार्टी तीन में से दो निगमों उदयुपर और बीकानेर में एक बार फिर अपना बोर्ड बनाने में सफल रही। उदयुपर में पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था और वहां जीएस टांक महापौर बने और बीकानेर में पार्टी के पास बढत थी और वहां सुशीला कंवर महापौर बनने में सफल रहीं।

खूब चली घेराबंदी- इस चुनाव के लिए जीते हुए पार्षदों की घेराबंदी खूब चली। मतदान के बाद से ही जीत की सम्भावना वाले पार्षदों को पार्टियों ने पूरे दस दिन तक होटलों में रिसोर्ट में रख कर “खातिरदारी“ की। लगभग आधे निकायों में बाजी निर्दलीय पार्षदों के हाथ में थी, इसलिए वहां भी जोड़ तोड़ खूब चली। मंगलवार को मतदान के दिन दल अपने अपने खेमे के पार्षदों को एक साथ लाए और वोट डलवा कर वापस ले गए। दरअसल अब बुधवार को उपाध्यक्ष का भी चुनाव होना है। ऐसे में उस पद पर कब्जे के लिए भी खींचतान होनी है।

भाजपा का आरोप कांगे्रस का असली चेहरा सामने आ गया- निकाय चुनाव के परिणाम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व और मुद्दा विहीन है। देश ने कांग्रेस के विचार को नकारा है। इस चुनाव में राज्य सरकार की बडी भूमिका होती है और जनता के मानस सत्ताधारी दल के साथ होता है, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।

Posted By: Navodit Saktawat