मनीष गोधा, जयपुर। कहते हैं जब बड़ा दर्द मिलता है तो इंसान या तो पूरी तरह से टूट जाता है या फिर उसे हथियार बनाकर ना सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी भी बदल देता है। ऐसा ही कुछ राजस्थान के जयपुर में रहने वाले असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पद्म सिंह की जिंदगी में भी घटा। पद्म सिंह ऐसे लोगों में शामिल हैं जिन्होंने अपनों के खोने का दर्द झेला है। 20 साल पहले उनकी नातिन वैष्णो देवी जाते वक्त कटरा में खो गई थी। गनीमत रही की कुछ अर्से बाद उनकी नातिन दोबारा मिल गई। पद्म सिंह और उनके परिवार ने इस दौरान जो दर्द झेला उसी दर्द ने उन्हें 300 परिवार के लिए मसीहा बना दिया।

बच्चों को खोजने के बने एक्सपर्ट

अपनी नातिन को कुछ वक्त के लिए खोने वाले पद्म सिंह की जिंदगी इस घटना के बाद बदल गई। आज वह राजस्थान पुलिस में गुमशुदा बच्चों को खोजने के एक्सपर्ट माने जाते हैं। वह 31 दिसंबर 2019 को नौकरी से रिटायर होने जा रहे हैं। बच्चों को खोजने की उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए राजस्थान डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने उन्हें रिटायरमेंट के बाद पुलिस अकादमी में इसकी ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव दिया है।

175 बच्चियों को परिवारों से मिलाया

पद्मसिंह 1978 में कान्स्टेबल के बतौर राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे। 41 साल की नौकरी में रहे पद्म सिंह की जिंदगी के पिछले लगभग 18 साल कुछ जुदा रहे हैं। नातिन खोने के बाद मिले दर्द ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया। इसके बाद वह हर गुमशुदा बच्चे को खोजने में जुट गए। उनकी यह कोशिश कब उनका जुनून बन गई यह पता ही नहीं चला। पिछले लगभग दो दशकों में वह 175 गुमशुदा बच्चियों को खोजकर उनके परिवार से मिला चुके हैं। इतना ही नहीं लगभग 125 मामलों में उन्होंने अन्य पुलिसकर्मियों की गुमशुदा बच्चों को खोजने में मदद की है।

पिछले साल किया 26 हजार किलोमीटर सफर

एएसआई पद्म सिंह बताते हैं कि गुमशुदा बच्चों की तलाश में पिछले साल उन्होंने लगभग 26 हजार किलोमीटर का सफर किया। एक मामले में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पास गुहार लगने के बाद आला अधिकारियों ने पद्म सिंह को केस सौंपा था, इस पर उन्होंने 24 घंटे में ही खोई हुई युवती की बरामदगी कर ली थी।

Posted By: Neeraj Vyas

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