जयपुर । राजस्थान में लंबे समय से चल रहा सियासी संकट आखिरकार आज पूरी तरह से खत्म हो गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने आज विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। गौरतलब है कि राजस्‍थान विधानसभा का सत्र आज से शुरू हुआ और सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने विश्‍वास प्रस्‍ताव का नोटिस दिया है, जिस पर करीब 3 घंटे बहस चली। वहीं, विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के लिए सचिन पायलट के साथ ही कांग्रेस के अन्‍य दिग्‍गज नेता और मंत्री सदन पहुंचे। इस बीच, दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दी गई।

वहीं भाजपा अविश्वास प्रस्ताव भी लेकर आई। यह सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव था। प्रदेश में करीब 32 दिनों तक चली कांग्रेस की आंतरिक कलह और विपक्षी दल भाजपा के हमलावर होने से सत्र के हंगामेदार रहने के आसार थे। इस दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त, फोन टैपिग व घेरेबंदी जैसे मुद्दों को लेकर तीखी बहस हुई।

भाजपा विधायक दल की गुरुवार को आयोजित बैठक में विधानसभा सत्र के दौरान पार्टी की रणनीति को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान तय किया गया कि पार्टी सरकार के खिलाफ शुक्रवार को ही अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी। अविश्वास प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और प्रस्ताव के लिए जरूरी 40 विधायकों के हस्ताक्षर भी करवा लिए गए हैं।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि जिस तरह प्रदेश कांग्रेस सरकार दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है, उससे विकास कार्य अटक गए हैं। जनता त्रस्त है। ऐसी स्थिति में भाजपा सशक्त विपक्ष के नाते सत्र के पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। यह पूछे जाने पर कि भाजपा के 72 और सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायकों को मिलाकर यह संख्या 75 होती है, जिससे साबित होता है कि संख्या बल भाजपा के पास नहीं है, इस पर कटारिया ने कहा कि अभी हमारे पास केवल हमारे ही विधायक हैं। प्रस्ताव लेकर आने पर जो भी सरकार के खिलाफ होगा, वह हमारे साथ जुड़ जाएगा।

गहलोत का तंज-19 विधायकों के बिना भी बहुमत साबित कर देता

उधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरकारी आवास पर गुरुवार शाम को हुई विधायक दल की बैठक में उन्होंने कहा कि जो अब तक हुआ, उसे भुला दीजिए। हम 19 विधायकों के बिना भी बहुमत साबित कर देते, मगर इसमें खुशी नहीं मिलती, क्योंकि अपने तो अपने होते हैं । बैठक में सचिन पायलट ने विधायकों व पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का आभार जताया । उन्होंने गहलोत को भी धन्यवाद दिया ।

वेणुगोपाल ने की गहलोत व पायलट से बात

गहलोत और पायलट के बीच दूरी कम करने के लिए सोनिया गांधी के निर्देश पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक से पहले दोनों नेताओं से अलग-अलग बात की। फिर एक साथ चर्चा की । वेणुगोपाल ने दोनों खेमों के विधायकों की अलग-अलग बात भी सुनी । इसके बाद शाम को विधायक दल की बैठक में सभी विधायक शामिल हुए ।

गहलोत से मिलने पहुंचे पायलट

विधायक दल की बैठक से पहले सचिन पायलट गहलोत से मिलने उनके आवास पर पहुंचे । गहलोत ने सुबह पायलट और उनके खेमे के विधायकों को फोन कर बातचीत करने के लिए बुलाया था।

दो विधायकों का निलंबन रद

बागी विधायकों की घर वापसी के बाद कांग्रेस नेतृत्व के तीखे तेवर नर्म होते जा रहे हैं। पार्टी के महासचिव अविनाश पांडे ने बताया कि विधायक भंवर लाल शर्मा और विश्वेंद्र सिह के निलंबन को रद कर दिया गया है । इन दोनों विधायकों पर अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश में शामिल होने का आरोप था ।

भाजपा इसलिए लाएगी अविश्वास प्रस्ताव

भाजपा नेता व विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक विधानसभा की अस्थाई कार्य सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में लगता है कि सरकार सिर्फ बहुमत साबित कर सत्र खत्म करवा देगी। इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे और विधानसभा सत्र में सरकार की विफलताओं को दर्ज कराएंगे।

सदन का गणित

200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 106 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष को नहीं जोड़ा गया है) हैं। इसके अलावा 13 निर्दलीयों का सरकार को समर्थन हासिल है। भारतीय ट्राईबल पार्टी के दो और आरएलडी के एक विधायक ने भी सरकार को समर्थन दिया है । माकपा के दो में से एक विधायक सरकार के साथ हैं, वहीं एक तटस्थ हैं। भाजपा के खुद के 72 विधायकों के साथ ही सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायक भी उनके साथ हैं । अगर किसी परिस्थिति में सदन में मतदान होता है और दोनों पक्षों के वोट बराबर आते हैं तो विधानसभा अध्यक्ष को मतदान करने का अधिकार है।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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