जयपुर। गर्भवती तथा प्रसूता महिलाओं और बच्‍चों के लिए राजस्थान के हर गांव में चल रहे आंगनबाडी केन्द्रों पर अब महिलाओं और बच्चों को रोजाना की खिचड़ी से मुक्ति मिलने वाली है। सरकार इनके लिए अब गर्म दाल, रोटी और तिल व बेसन के लडडू परोसने की तैयारी कर रही है। राजस्थान में महिला और बाल विकास विभाग के तहत 62 हजार आंगनबाड़ी केंद्र चलते हैंं और इन केन्द्रों पर करीब 40 लाख गर्भवती और प्रसूता महिलाएं तथा छोटे बच्चों को रोज पोषक भोजन दिया जाता है। इन केन्द्रों पर महिलाओं की स्वास्थ्य जांच और विभिन्न गतिविधियों के अलावा अब छोटे बच्चों के लिए प्री प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था भी हो रही है।

इन केन्द्रों पर अब तक महिलाओं और बच्चों को नाश्ते के रूप में गुड़, चना व मुरमरे तथा भोजन के रूप में खिचड़ी व दलिया दिया जाता रहा है। लेकिन रोजाना एक ही तरह के भोजन से यहां आने वाली महिलाओं और बच्चों में कुछ अरूचि देखी जा रही है। इसी के तहत अब विभाग ने इन केन्द्रों पर दिए जाने वाले भोजन के मेन्यू में कुछ बदलाव करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत यहां गर्म रोटी, दाल, चावल, सब्जी और सर्दी में तिल या बेसन के लडडू या गुड़ व मूंगफली की चिक्की व गर्मी में मूंग बर्फी जैसी कोई चीज परोसने की तैयारी है।

इसी तरह नाश्तेे मे भी पोहा, फल आदि देने की तैयारी है। विभाग की मंत्री ममता भूपेश इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है और अब इसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की पहली वर्षगांठ पर इसकी घोषणा हो सकती है। दरअसल ये केन्द्र गर्भवती और प्रसूता महिलाओं तथा छह वर्ष की उम्र तक के बच्चों को पूरक पोषाहार देने तथा उनकी स्वास्थ्य जांच के लिए खोले गए हैं।

इन केन्द्रों पर करीब दस लाख बच्चे और तीस लाख महिलाएं रोज आती हैं। प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 500 कैलोरी और 15 ग्राम प्रोटीन तथा प्रत्येक महिला को 600 कैलोरी तथा 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है। इसी के तहत नाश्ता व दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसके लिए प्रति बच्चा आठ रुपए और प्रति महिला साढ़े नौ रुपए दिए जाते हैं। यह राशि पंचायत को जाती है और पंचायत ही इस केन्द्र का संचालन करती है।

Posted By: Navodit Saktawat

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