रघुवरशरण, अयोध्या। रामलीला वैश्विक स्तर पर पसंद की जा रही है। इसी क्रम में 20 अगस्त को 18 सदस्यीय रामलीला मंडली अयोध्या शोध संस्थान से मॉरीशस के लिए रवाना हो रही है। यह दल 22 अगस्त को मॉरीशस पहुंचेगा। 29 अगस्त तक स्थानीय कलाकारों का दल रामायण सेंटर में रामलीला के विविध प्रसंगों की रंगारंग प्रस्तुति देगा। आधुनिक शोध के अनुसार, रामलीला का मंचन विश्व के 29 देशों में होता है। अयोध्या शोध संस्थान रामकथा की व्यापकता को नए सिरे से वैश्विक पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

शोध संस्थान का प्रयास 2012 में उस वक्त फलीभूत हुआ, जब संस्थान के आमंत्रण पर पहली बार विदेशी कलाकारों का दल प्रस्तुति के लिए रामनगरी पहुंचा। इस दल में त्रिनिडॉड, टोबैको एवं सूरीनाम के कलाकार शामिल थे। 2012 के ही उत्तरार्ध में थाईलैंड के कलाकारों का दल रामलीला मंचन के लिए शोध संस्थान पहुंचा और इस सच्चाई को पुष्ट किया कि पूर्वी एशियाई देश में भी रामलीला की परंपरा विद्यमान है।

2014 में थाईलैंड के कलाकारों का दल दूसरी बार रामलीला की प्रस्तुति के लिए रामनगरी पहुंचा तो इस साल इंडोनेशिया और कंबोडिया के दल ने रामलीला की प्रस्तुति दी। इसी साल रामनगरी के कलाकार भी थाईलैंड गए और वहां रामलीला प्रस्तुति की उम्दा छटा बिखेरी। 2016 में फिजी, न्यूजीलैंड और थाईलैंड के कलाकार रामलीला की प्रस्तुति के लिए अयोध्या आए। 2017 में 10 जुलाई से चार अगस्त तक रामलीला के स्थानीय कलाकारों ने त्रिनिडॉड, टोबैको, फिजी एवं सूरीनाम की यात्रा कर अपनी कला का प्रदर्शन किया।

इसी साल 18 अक्टूबर को दीपोत्सव में इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया आदि के कलाकार आए। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि भगवान राम और सनातन धर्म अनादि हैं। कोई शक नहीं कि इस्लाम एवं ईसाइयत में विभाजित दुनिया से पूर्व राम पूरे विश्व की सांस्कृतिक एकता के महानायक थे।