मुंबई। RBI ने सोमवार को जीरो बैलेंस अकाउंट्स से जुड़े नियम बदल दिए। इससे बैंकअब ऐसे खाताधारकों को चेकबुक तथा अन्य सुविधाएं दे सकेंगे। इन सुविधाओं के एवज में बैंक हालांकि खाताधारकों को खाते में कोई न्यूनतम बैलेंस रखने के लिए नहीं कह सकते हैं। पहले जीरो बैलेंस अकाउंट्स पर अतिरिक्त सुविधाएं देने से वे रेग्युलर सेविंग्स अकाउंट्स बन जाते थे और उसके बाद उन खातों में न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य हो जाता था और अन्य शुल्क भी लागू हो जाते थे।

आरबीआई ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) अकाउंट्स के लिए नियमों में ढील दी है। इन अकाउंट्स को आम तौर पर जीरो बैलेंस अकाउंट्स या नो-फ्रिल्स अकाउंट्स भी कहा जाता है। वित्तीय समावेशीकरण की कोशिशों के तहत आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि वे बीएसबीडीए को भी उसी तरह से कुछ न्यूनतम सुविधा निशुल्क दें, जिस तरह की सुविधाएं सेविंग्स अकाउंट्स में दी जाती हैं।

आरबीआई ने अपने निर्देश में कहा कि बैंक पहले बताई गई न्यूनतम सुविधाओं के बाद अतिरिक्त मूल्य वर्धित सुविधाएं देने के लिए स्वतंत्र हैं। इन सुविधाओं में चेक बुक जारी करना भी शामिल है। इनके लिए शुल्क नहीं लिए जा सकते हैं और इसमें कोई भेद-भाव नहीं बरती जाएगी। इस तरह की अतिरिक्त सुविधाएं यदि बिना शुल्क लिए दी जा रही हैं, तो इन सुविधाओं के दिए जाने से ये अकाउंट्स नॉन-बीएसबीडी अकाउंट नहीं बन जाएंगे।

बीएसबीडी खातों के बारे में पहले ये थे नियम

बीएसबीडी अकाउंट्स से जुड़े पहले के नियमों के तहत खाताधारकों पर खाते में नयूनतम बैलेंस रखने जैसी कोई बाध्यता नहीं होती है और उन्हें कुछ न्यूनतम सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं। नियमों में ढील दिए जाने के बाद अब बीएसबीडी खाते में एक महीने में कितनी बार पैसे जमा की जा सकती है और कितनी रकम जमा की जा सकती है, इस पर कोई सीमा नहीं होगी।

खाते से 10 लाख की निकासी पर लग सकता है पांच फीसदी टैक्स

आगामी बजट में खाते से सालभर में कुल 10 लाख रुपए की निकासी पर 3-5 फीसदी टैक्स लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय इससे संबंधित एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आंतरिक स्तर पर चर्चा हुई है। अभी यह तय किया जा रहा है कि कितना टैक्स लगाया जाए। यह 3-5 फीसदी के स्तर से कम नहीं होगा।

Posted By: Ajay Barve