नई दिल्ली। जो लोग सोचते हैं कि देश में फर्जी तरीक से ड्राइविंग लाइसेंस बनावाना आसान है, वो सोच बदल लें। मोदी सरकार मोटर (संशोधन) विधेयक, 2019 ला रही है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कैमरा व कंप्यूटर आधारित परीक्षा का प्रावधान किया गया है। इससे फर्जी ड्राइविंग लाइसेंसों पर अंकुश लगेगा तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इस बिल पर चर्चा करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में कई अहम बातें कहीं। आप भी पढ़ें-

ऐसे कुशल लोग ड्राइवर बनेंगे तथा दुर्घटनाओं में आएगी कमी

- देश में 30 फीसद फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस हैं। एक आदमी 4-4 लाइसेंस लेता है। इसलिए हमने इस बिल में ऑनलाइन पहचान व सत्यापन के बाद लाइसेंस देने की व्यवस्था की है। इससे फर्जी लाइसेंस बनने बंद हो जाएंगे।

- देश में 25 लाख ड्राइवरों की कमी है। इसे दूर करने के लिए हम हर पिछड़े राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस इंस्टीट्यूट खोलेंगे। इससे कुशल लोग ड्राइवर बनेंगे तथा दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

- नेशनल रजिस्टर से लाइसेंस का कहीं भी ट्रांसफर हो सकेगा। ट्रांसपोर्ट लाइसेंस 3 की जगह 5 साल के लिए मान्य होगा। अब लाइसेंस नवीकरण के लिए 1 साल पहले अप्लाई कर सकते हैं। बिल में वाहनों की पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार की व्यवस्था भी की गई है।

- अभी नई गाड़ी खरीदते वक्त गाड़ी को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के पास भेजने का प्रावधान है। परीक्षण के बाद RTO वाहन को वापस डीलर के पास भेजता है। परंतु वास्तव में ऐसा होता नहीं है। कोई गाड़ी RTO के पास नहीं जाती। गाड़ियां डीलर के पास ही रहती हैं। डीलर किस गाड़ी के लिए आरटीओ को कितना पैसा भेजेगा इसका रेट तय है। इसे खत्म करने के लिए बिल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया है। गाड़ियां अब भी डीलर के पास रहेंगी। किंतु टैक्स लेने, पंजीकरण व नंबर देने का काम RTO ऑनलाइन करेगा। इससे लोगों को भ्रष्टाचार से राहत मिलेगी।

Posted By: Arvind Dubey

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