नई दिल्ली। सारधा चिटफंड घोटाले की सीबीआइ जांच में रोड़ा अटकाने वाले पश्चिम बंगाल कैडर के आइपीएस अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऐसे आइपीएस अधिकारियों की भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय यह देखना चाहता है कि इन आइपीएस अधिकारियों ने अपनी सेवा नियमावली का उल्लंघन तो नहीं किया है।

ध्यान देने की बात है कि देशभर के आइपीएस अधिकारियों की सेवा गृह मंत्रालय के अधीन रहती है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीबीआइ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चिटफंड घोटाले की जांच रही है और उसे किसी से पूछताछ करने का पूरा अधिकार है।

पश्चिम बंगाल में तैनात आइपीएस अधिकारियों को अपनी सेवा नियमावली की जानकारी होनी चाहिए कि जिसमें देश के संविधान और संघीय ढांचे की सुरक्षा की प्रतिबद्धता की बात है।

आइपीएस और आइएएस देश के संघीय ढांचे को प्रदर्शित करते हैं, जिनमें वे सेवा तो राज्य में दे रहे होते हैं, लेकिन उनका कैडर केंद्र सरकार के अधीन होता है।

यदि किसी आइपीएस अधिकारी ने जानबूझकर केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच करने में बाधा पहुंचाने की कोशिश की है तो यह सीधे तौर पर सेवा नियमावली का उल्लंघन है और उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीबीआइ अधिकारियों पर हमले और हिरासत को गंभीरता से लिया गया है और उनकी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

रविवार शाम को जैसे ही कोलकाता के सीबीआइ दफ्तर को स्थानीय पुलिस द्वारा घेरे जाने की जानकारी मिली गृह मंत्रालय ने तत्काल उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा मुहैया करा दी।

यही नहीं, कोलकाता में तैनात सीबीआइ अधिकारियों को भी सीआरपीएफ की सुरक्षा दी गई है।

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