दुबई। सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरैमको पर पिछले शनिवार को ड्रोन हमला किया गया था। इसका असर सोमवार को नजर आया, जब ग्लोबल क्रूड आउटपुट में 5 फीसदी तक कमी दर्ज की गई। इससे कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत पर पड़ा। सोमवार को कच्चे तेल का दाम 19.5 फीसद उछाल के साथ लगभग 72 डॉलर पर पहुंच गया। पिछले लगभग तीन दशकों के दौरान कच्चे तेल की कीमत में यह सबसे तेज वृद्धि है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के ऊर्जा मंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऑयल रिजर्व का इस्तेमाल पर बयान दिया तब तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक ने भी तेल की कमी नहीं होने देने का भरोसा दिया है।

इस बीच, भारत में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हमले के बाद हमने अरैमको के अधिकारियों से बात की है। हमने सितंबर के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता की समीक्षा की है। हम आश्वस्त हैं कि भारत को आपूर्ति में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। बता दें भारत के लिए सऊदी अरब दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है।

जानकारों के मुताबिक अगले एक पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल के दाम में पांच-छह रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की आशंका है। कच्चे तेल का दाम बढ़ने से राजकोषीय स्थिति पर एकदम से दबाव बढ़ेगा, महंगाई भी बढ़ सकती है। इकरा के मुताबिक औद्योगिक ग्राहकों की लागत पर बहुत बुरा असर हो सकता है, उनकी प्रॉफिट तेजी से घट सकती है।

ऐसे किया गया था हमला

सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरैमको पर पिछले सप्ताह शनिवार को ड्रोन हमला किया गया था। इस हमले से इसके दो प्लांट को नुकसान पहुंचा है, जिससे इसकी उत्पादन क्षमता घटकर आधी रह गई है। जानकारों के मुताबिक अरैमको को अपनी पुरानी उत्पादन क्षमता में लौटने में महीनों का समय लग सकता है। इससे पहले कहा गया था कि यह कुछ सप्ताह में प्लांट की मरम्मत का काम पूरा कर लेगी। एक्सपोर्ट होने से पहले कच्चे तेल से अशुद्धियों को बाहर किया जाता है। अरैमको के जिस प्लांट पर हमला हुआ है, उसमें कच्चे तेल की रिफाइनिंग की जाती थी। इस हमले के बाद कच्चे तेल के उत्पादन में 57 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई है।