प्रेमविजय पाटिल, धार। कमाई और आत्मनिर्भरता के मामले में लगातार दो वर्ष तक राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने वाली धार जिले की छोटी सी ग्राम पंचायत सुंद्रेल के सामने भी कोरोना काल में संकट की स्थिति बन गई। प्रति सप्ताह यहां लगने वाले बड़े पशुहाट से होने वाली कमाई से पंचायत ने ग्रामीणों को न सिर्फ शहरों की तरह बेहतर सुविधाएं निशुल्क दे रखी थी बल्कि कई सुविधा में शहरी क्षेत्रों से भी यहां स्थिति बेहतर थी। लाॅकडाउन की वजह से पंचायत की आय बंद हो गई लेकिन यहां के लोगों ने हौसले से कठिन समय का सामना किया। पंचायत की बचत की प्रवृत्ति और मदद के जज्बे ने बीते सात-आठ माह में भी स्थिति बिगड़ने नहीं दी। पंचायत ने अपने ग्राम कोष से बगैर सरकार की मदद लिए गांव की व्यवस्था का संचालन बदस्तूर जारी रखा। जिस दौर में आर्थिक संकट की वजह से कंपनियां लोगों को नौकरियों से हटा रही थी उस दौर में भी छोटी सी पंचायत ने न सिर्फ अपने अस्थाई कर्मचारियों को सहेजा बल्कि गैर जरुरी खर्च में कटौती कर लोगों की मदद के लिए हर माह राशि भी जुटाई।

सालाना आय एक करोड़ इसलिए ग्रामीणों को मुफ्त पानी और सफाई

सुंद्रेल ग्राम पंचायत आमदनी के मामले में प्रदेश की आत्मनिर्भर पंचायत मानी जाती है। यहां लगने वाले पशुहाट से एक करोड़ रुपए सालाना आय पंचायत को होती है। यहां के रहवासी और जनप्रतिनिधियों के जागरुक होने की वजह से गांव में शहरों की तरह सुविधाएं और बेहतर विकास कार्य हुए हैं। पूरे गांव में सुव्यवस्थित नलजल योजना संचालित हो रही है। बीते कई सालों से डोर टू डोर कचरा संग्रहण का कार्य जारी है। गांव में गेस्ट हाउस और आठ मांगलिक भवन भी बनाए गए हैं ताकि ग्रामीणों को अपने आयोजनों के लिए परेशान न होना पड़े। पंचायत ने अपनी आमदनी के लिए 25 दुकानें भी बना रखी हैं। बीते कई वर्षों से गांव के 1 हजार 675 परिवारों को मुफ्त पेयजल प्रदाय पंचायत कर रही है।

कोरोना में कमाई बंद हुई तब भी सरकार से नहीं मांगी मदद

24 मार्च को जैसे ही लॉकडाउन की शुरुआत हुई तो पंचायत में साप्ताहिक हाट लगना बंद हो गया। इससे सात महीने से पंचायत की आमदनी नहीं हुई। पशुहाट से मिलने वाले करीब 60 लाख रुपए नहीं मिले। कठिन समय में भी पंचायत ने अपने उन 15 अस्थाई कर्मचारियों को सहेज कर रखा जिन्हें ग्राम कोष की मदद से नौकरी पर रखा गया था। उन्हें वेतन आदि का भुगतान भी समय पर होता रहा। इन कर्मचारियों सफाई कार्य में जुटाया गया। इसका लाभ यह हुआ कि कोरोना काल में बार-बार होने वाली सफाई ने संक्रमण भी फैलने नहीं दिया। महिला सरपंच बसंती बाई खेमा देसाई व उपसरपंच रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि आपदाकाल में राहत की आवश्यकता होती है। इस समय हमने सभी की मदद से व्यवस्थाएं बनाए रखी। कुछ लोगों ने कहा भी कि जब बड़ी-बड़ी कंपनियां कर्मचारी नहीं रख पा रही हैं तो हम इतने कर्मचारियों का वेतन कैसे देंगे। लेकिन हमने ग्राम कोष की मदद से कर्मचारियों को नियमित वेतन भुगतान किया। सात माह में बगैर शासन की मदद के व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के अलावा किसी भी सुविधा में कटौती नहीं की गई है।

100 जरुरतमंद परिवारों को तीन माह तक राशन

कोरोना काल में कुछ समय ऐसा भी रहा जिसमें गांव के कुछ परिवारों के पास काम नहीं था। पंचायत ने लगातार तीन माह तक ऐसे 100 परिवारों के घर राशन आदि पहुंचाया ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। पंचायत के सचिव धर्मेंद्र नरगावे ने बताया कि हमारी आमदनी पिछले 7 महीने से नहीं हो पा रही है। ग्राम कोष से हमने व्यवस्थाएं बनाई हैं। हमने इस मामले में शासन की ओर नहीं देखा।

आत्मनिर्भरता के लिए दो बार मिला राष्ट्रपति पुरस्कार

सुंद्रेल पंचायत को वर्ष 2018 और 2019 में बेहतर आय और आत्मनिर्भर होने के लिए लगातार दो वर्ष राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। सुंद्रेल पंचायत अपने यहां के ऐसे विद्यार्‍िथयों को लेपटाॅप देती है जो कक्षा दसवीं और बारहवीं में टाॅपर रहते हैं।

यह होता है ग्राम कोष

- अधिकांश पंचायतें आत्मनिर्भर नहीं होती हैंं। पंचायतों को सरकार से मिलने वाली राशि पर निर्भर रहना होता है। पंचायत अपनी आमदनी से ग्राम कोष तैयार कर सकती है। सुंद्रैल पंचायत ने इसी कोष की मदद ली। यहां का कोष मजबूत होने व सही संचालन से शहर सी सुविधा ग्राम वालों को मिलती है।

हौसले से ऐसे हारा संकट काल

- कमाई में राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त पंचायत की आय शून्य हुई तो बचत की आदत ने दिखाया कमाल- न कर्मचारी कम किए न गांव की सुविधाएं

-1675 परिवारों के गांव में पहले की तरह मुफ्‍त पानी करते रहे वितरित

-लाॅकडाउन में जब नौकरियां समाप्त हो रही थी तब पंचायत अपने यहां लोगों को न सिर्फ काम दे रही थी बल्कि 100 गरीब परिवारों को राशन देकर मदद भी कर रही थी।

-डोर टू डोर कचरा कलेक्शन से लेकर गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएं भी संचालित होती हैं इस आदर्श गांव में

- एक दूसरे की मदद के भाव से आगे बढ़ रहा है सुंद्रेल

सुंद्रेल हमारे जिले की आदर्श पंचायत है। कोरोना काल में अपनी बचत से पंचायत ने बेहतर कार्य किया है। नवाचार के लिए यहां के लोग हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं। गोबर से खाद बनाकर विक्रय के साथ ही यहां अत्याधुनिक गौशाला का निर्माण भी करवाया जा रहा है।

डाॅ.संतोष वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धार

Posted By: Navodit Saktawat