नई दिल्ली। Ayodhya Verdict 2019 : अयोध्या मामला देश का सबसे पुराना विवादास्पद विषय रहा है। साल 1950 में पहली बार इस मामले में केस दायर हुआ था और 11 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुबह 10:30 बजे दिया जाएगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के 17 नवंबर को रिटायर होने से पहले फैसला सुनाया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस एसए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर हैं।

सरकार ने अयोध्या के फैसले से पहले पांचों न्यायाधीशों को प्रदान की गई सुरक्षा बढ़ा दी है। चीफ जस्टिस को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए लखनऊ और अयोध्या में दो हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

इससे पहले शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों से इस संबंध में कानून-व्यवस्था की व्यवस्था पर चर्चा की थी। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में कम से कम 12,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हिंसा की कोई घटना न हो। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, जम्मू, दिल्ली और राजस्थान की सरकारों ने राज्य के सभी स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों को आज से सोमवार तक बंद रखने का आदेश दिया है।

अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि पर विवाद है। इस पर हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों की ओर से दावा किया गया है। इस मामले में 1980 के दशक से राजनीति हावी है। हिंदू कार्यकर्ता इस जगह पर एक मंदिर बनाना चाहते हैं, जबकि मुस्लिम समूहों का दावा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई मंदिर वहां मौजूद था।

1992 में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने 16वीं सदी में इस जगह पर बनाई गई बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था, जिसके बारे में उनका मानना ​​था कि यह एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जो भगवान राम की जन्मस्थली थी। इसके बाद हुए दंगों में 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले ने सितंबर 2010 में विवादित भूमि का बंटवारा तीन हिस्सों में किया था। इसके जरिये वह विवाद में शामिल पक्षों, सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला को संतुष्ट करना चाहता था, लेकिन वह कोशिश विफल रही थी और तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

यह सुनिश्चित करने के प्रयास में कि फैसले के बाद हिंसा नहीं हो, आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों के साथ बैठक की। उन्होंने फैसला किया कि किसी को भी विवाद में शामिल नहीं होना चाहिए, चाहे सुप्रीम कोर्ट का फैसला जैसा भी आए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हिंदी में कई ट्वीट्स किए। उन्होंने कहा कि अयोध्या का फैसला किसी की जीत या हार नहीं होगी। यह देश के नागरिकों की प्राथमिकता है कि वह सद्भाव बनाए रखे। मैं देशवासियों से अपील करता हूं कि अयोध्या के फैसले के बाद शांति और सद्भाव बनाए रखने की हमारी परंपरा को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। अयोध्या के फैसले के बाद, विभिन्न लोगों और संगठनों द्वारा सामंजस्यपूर्ण माहौल बनाए रखने के प्रयास किए गए हैं।

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