श्रीनगर। लद्दाख क्षेत्र में बार-बार घुसपैठ करने वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान अब नियंत्रण रेखा (एलओसी)से लगती गुलाम कश्मीर की अग्रिम चौकियों पर भी देखे जाने लगे हैं। पीएलए की इन गतिविधियों ने सुरक्षा हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

हाल के तीन महीनों से गुलाम कश्मीर में पीएलए ने अपनी अचानक गतिविधियां तेज कर दी है। गत दिनों पीएलए के अधिकारियों और जवानों का दल पाकिस्तानी सैनिकों के साथ उत्तरी कश्मीर में नौगाम-कुपवाड़ा सेक्टर के सामने गुलाम कश्मीर के अग्रिम इलाकों में देखा गया है। कुछ समय पहले टंगडार सेक्टर में भी चीनी सैनिकों को एलओसी के साथ सटे इलाकों में घूमते देखा गया था।

वैसे तो गुलाम कश्मीर में चीनी सैनिकों की उपस्थिति 2012 से देखी जा रही है। लेकिन पहले इनकी गतिविधियां सिर्फ गिलगित-बाल्टिस्तान तक ही सीमित थीं। वहीं 2014 के बाद पीएलए ने गुलाम कश्मीर के अन्य इलाकों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। भारत सरकार ने कई बार गुलाम कश्मीर में चीनी सेना की उपस्थिति पर एतराज जताया। लेकिन पाकिस्तान और चीन हमेशा इसे नकारते रहे हैं। इनकी दलील रही है कि 46 बिलियन डालर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कारीडोर परियोजना की निगरानी के लिए इंजीनियरों के अलावा अन्य संबधित स्टाफ ही गुलाम कश्मीर में आ-जा रहे हैं।

सुरंगें बना रहे हैं चीनी सैनिक!

सूत्रों के अनुसार चीनी सैनिकों द्वारा गुलाम कश्मीर में लीपा घाटी में सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा एक सड़क भी तैयार की जा रही है, जो ग्वादर बंदरगाह को गुलाम कश्मीर के रास्ते काराकोरम हाईवे और जियांग को जोड़ेगी। इसके अलावा चीन की जिहोबा ग्रुप ऑफ कंपनी लिमिटेड गुलाम कश्मीर में झेलम-नीलम दरिया पर 970 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना तैयार कर रही है।

30 हजार सैनिकों की तैनाती की तैयारी

बताया गया है कि चीनी सैनिक गुलाम कश्मीर में अपने लिए ऑपरेशन ढांचा तैयार करने के अलावा तीन सैन्य डिवीजनों का भी गठन कर रहे हैं। इन डिवीजनों में लगभग 30 हजार चीनी सैनिक होंगे। इनकी गुलाम कश्मीर में स्थायी तौर पर तैनाती होगी। तीनों डिवीजनों का नाम गुलाम कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासन के साथ बातचीत के आधार पर तय किया जाएगा। संभवतः यह गुलाम कश्मीर से ही जुड़े किसी नए सुरक्षा तंत्र पर हो, ताकि भारत के एतराज को नकारा जा सके। इन डिवीजनों की मुख्य जिम्मेदारी गुलाम कश्मीर में चीन के व्यापारिक, आर्थिक और सामरिक हितों की सुरक्षा को यकीनी बनाना होगा।

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