नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के निरस्त होने के बाद से आतंकवादियों की घुसपैठ में तेजी देखने को मिली है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि इसे पाकिस्तानी आतंकवादी समूहों के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो घाटी में आतंकी हमलों के साथ गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था।

इसके बाद से घाटी में आतंकी घटनाओं में तेज कमी दर्ज की गई है। इस दिन के बाद से छुट-पुट घटनाओं को छोड़कर कोई भी बड़ी घटना या पत्थरबाजी की घटना वहां देखने को नहीं मिली है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार, केंद्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि जुलाई में घुसपैठ के सिर्फ छह मामले सामने आए थे। इसकी तुलना में पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसलों की घोषणा के बाद से 40-50 आतंकवादी कश्मीर घाटी में घुस गए हैं।

सीमा पार से घुसपैठ में हो रही तेजी उन खुफिया सूचनाओं के बीच हुई है, जिसमें कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने एलओसी के पास आतंक के सात लॉन्चपैड को फिर से सक्रिय कर दिया है। बताया जा रहा है कि 200 से अधिक आतंकवादी सीमा पार कर भारत में घुसने की फिराक में बैठे हैं।

बताया जा रहा है कि इस साल फरवरी में पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के ठिकानों पर भारतीय वायु सेना की तरफ से किए गए हवाई हमलों के बाद इन लॉन्चपैड्स को अस्थायी रूप से छोड़ दिया गया था। बता दें कि बीते दिनों भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के एक दल द्वारा घुसपैठ की नाकाम कोशिश का एक वीडियो शेयर किया था।

तीन अगस्त के इस वीडियो में कम से कम चार शव देखे गए थे, जिन्हें पाक सेना ने लेने से भी इनकार दिया था। भारतीय सेना ने इनके पाकिस्तानी सैनिक होने के सबूत भी पेश किए थे। मारे गए घुसपैठियों में आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान की सेना के जवान भी शामिल थे।