तिरुअनंतपुरम। वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयान से एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। थरूर ने कहा है कि "बाहरी नगाओं" के बीच जाकर प्रधानमंत्री जब उनकी टोपी पहन सकते हैं तो वह मुस्लिमों की टोपी पहनने से क्यों इन्कार कर देते हैं? केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने थरूर के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसे उत्तर-पूर्वी इलाके और वहां बसे आदिवासियों का अपमान बताया है। रिजिजू ने कांग्रेस से माफी मांगने के लिए कहा है।

थरूर ने कहा, प्रधानमंत्री देश में या देश के बाहर जहां भी जाते हैं वहां की परंपरागत टोपी लगाने में उन्हें कोई हर्ज नहीं होता लेकिन मुस्लिमों की परंपरागत टोपी लगाने से वह हमेशा इन्कार कर देते हैं। वह ऐसा क्यों करते हैं ? कांग्रेस नेता ने कहा, हाल ही में नगाओं की पंखों से बनी टोपी पहने हुए प्रधानमंत्री को देखा गया। उन्हें कई बार खास तरह की पोशाकें पहने भी देखा गया है।

प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें ऐसा करना भी चाहिए। प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी भी परंपराओं का पालन करते हुए कपड़े इत्यादि पहनती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के किसी एक के लिए इन्कार की वजह समझ नहीं आई। पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर घृणा, हिंसा और असहिष्णुता पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।

थरूर इससे पहले यह कहकर विवाद खड़ा कर चुके हैं कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर से सत्ता में आती है तो वह दोबारा संविधान लिखेगी और वह "हिंदू पाकिस्तान" बनाने के रास्ते पर आगे बढ़ेगी। वह यह भी कह चुके हैं कि मोदी हरे रंग के कपड़े क्यों नहीं पहनते हैं, क्या वह इसे मुस्लिम तुष्टीकरण से जोड़कर देखते हैं। अरुणाचल प्रदेश से संबंधित केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने नगा आदिवासियों को पराई धरती पर रहने वाला बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने थरूर पर उत्तर-पूर्व के लोगों की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा का अपमान करने का आरोप लगाया है। भाजपा महासचिव राम माधव ने ट्वीट करके कहा है कि थरूर एक खास टोपी के प्यार में बोल रहे हैं। इस प्यार में उनका ध्यान नगा और उत्तर-पूर्व के लोगों के अपमान पर नहीं गया।

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