शिवकाशी। दिवाली आने को है और इससे पहले राजधानी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इस बीच पिछले साल पटाखों पर लगे प्रतिबंध को देखते हुए इस साल पटाखों की नगरी के रूप में विख्यात तमिलनाडु की शिवकाशी पहले से ही दिवाली के लिए ग्रीन पटाखों के साथ तैयार है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, इनसे प्रदूषकों का उत्सर्जन और आवाज कम होगी। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिवाली से पहले पारंपरिक पटाखों पर प्रतिबंध लगाए जाने से आठ लाख लोगों को रोजगार देने वाले इस कारोबार पर आशंकाओं के बादल गहरा गए थे, लेकिन इस बार यह नगरी दिवाली पर ग्रीन पटाखों की मांग पूरी करने के लिए तैयार है।

बता दें कि तमिलनाडु के मशहूर शिवकाशी और उसके आसपास पटाखो के निर्माण की 1,000 से ज्यादा इकाइयां हैं और जिनका वार्षिक टर्नओवर 6,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। तमिलनाडु में पटाखा उद्योग के सबसे बड़े संगठन तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. गणेशन के अनुसार, "2018 में पारंपरिक पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के कारण करीब चार महीनों (इस साल) तक पटाखों का निर्माण रुका रहा था। इसके बाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार ने 30 फीसदी कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों के निर्माण का प्रशिक्षण प्रदान कर हमारी मदद की।"

नागपुर स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और नेशनल एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के सहयोग से सफल प्रयोगों और प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के बाद इस साल मार्च में ग्रीन पटाखों का निर्माण शुरू हुआ था। गणेशन ने दावा किया कि ग्रीन पटाखों से प्रदूषण उत्सर्जन में 30 फीसदी की कमी आएगी। साथ ही इनके इस्तेमाल से शोर का स्तर भी 160 डेसिबल से घटकर 125 डेसिबल रह जाएगा। हालांकि इसका मानक स्तर 90 डेसिबल है।

उन्होंने बताया कि समय की कमी के कारण ग्रीन पटाखों पर "ग्रीन लोगो" और "क्विक रिस्पांस (क्यूआर) कोड" नहीं लगाए जा सके हैं। गणेशन ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें इनके बगैर भी ग्रीन पटाखों की बिक्री की इजाजत दे देगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले साल से ग्रीन पटाखों पर "ग्रीन लोगो" और "क्यूआर कोड" उपलब्ध होंगे।चीनी पटाखों के आयात पर चिंता व्यक्त करते हुए गणेशन ने कहा कि ग्रीन पटाखों का निर्माण सस्ता है और इनसे प्रदूषण भी कम होता है, लेकिन बाजार में वे अपनी उपस्थिति तभी दर्ज करा पाएंगे जब चीन से पटाखों का आयात न हो और पटाखों की गैरकानूनी इकाइयां बंद कर दी जाएं।

Posted By: Ajay Barve