नई दिल्ली। ओडिशा की जेलों में कैदियों के लिए बहुत ही बदतर हालात होने और कैदियों के कथित तौर पर बारी-बारी सोने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ ने बताया कि हम लोगों को अपने सहयोगियो (जजों) से पता चला कि वहां की जेलों में कैदी बारी-बारी सोते हैं। जबकि एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के अनुसार, जेलों में कैदियों के सोने के लिए पर्याप्त जगह का इंतजाम करने की बाध्यता है।

जस्टिस एस के कौल और के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि क्या आपने कभी ओडिशा की जेल का दौरा किया है। मुझे अपने एक भाई (न्यायाधीश) से पता चला है कि वे (कैदी) वहां बारी-बारी से सोते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो गारंटी देती है कि जेलों में सोने के लिए न्यूनतम स्थान होना चाहिए। हालत बहुत भयानक है।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम 1989 के तहत दर्ज मामले में दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि आरोपित पर अपनी मां को तमाचा मारने का आरोप है। बीस वर्षीय आरोपित 400 दिनों से अधिक समय से जेल में है। जेल में रहने के कारण इसकी पढ़ाई लिखाई भी बंद है।

इस मामले में सरकारी वकील ने कहा कि ओडिशा में जिला अदालतों में चल रही हड़ताल समाप्त हो गई है। याचिकाकर्ता अपनी जमानत के लिए वहां अपनी अर्जी दे सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं। इस मामले की अगली सुनवाई एक माह बाद होगी। राज्य के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि जमानत देने से शिकायतकर्ता को खतरे था।

इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता को कोई खतरा नहीं है। पीठ ने तर्कों को सुनने के बाद मामले को सुनवाई के लिए एक महीने के बाद की तारीख दी है, जबकि सरकारी वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता का बयान एक महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में दर्ज किया जाएगा।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai