डेनमार्क और नॉर्वे में बड़े अध्ययन से पता चला है कि सामान्य आबादी में संभावित दर के मुकाबले ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन की पहली डोज वाले कुछ लोगों में दिमाग समेत खून की नसों में थक्के बनने की दर मामूली सी बढ़ी हुई पाई गई है। हालांकि, भारत में अभी इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है।

"द बीएमजे" में बुधवार को प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि इस तरह के दुष्प्रभाव के मामले अपेक्षाकृत बहुत कम हैं। यूनिवर्सिंटी ऑफ सदर्न डेनमार्क और नार्वेजियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के अध्ययनकर्ताओं ने सामान्य आबादी और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रोजेनेका के कोरोना रोधी टीके की डोज लेने वाले लोगों में खून के थक्के और संबंधित जटिलताओं की तुलना की। इस साल फरवरी से 11 मार्च के बीच टीके की पहली डोज लेने वाले 18-65 उम्र समूह के 2,80,000 लोगों पर यह विश्लेषण किया गया। इनमें से एक लाख में से 59 लोगों में खून के थक्के पाए गए। दिमाग की नसों में खून का थक्का बनने की दर संभावित से ज्यादा रही। हालांकि, हार्ट अटैक का कारण बनने वाले, धमनियों में रक्त के थक्के जमने की दर में कोई वृद्धि नहीं देखी गई।

Posted By: Navodit Saktawat

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