कानपुर। इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को होने जा रहा है, जिसे भारत के अलावा एशिया, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर में दिखाई देगा। बताते चलें कि इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को लगा था, जबकि दूसरा ग्रहण 2 जुलाई को लगा था। दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिए थे। मगर, आखिरी ग्रहण भारत में दिखेगा, जिसमें कंकणाकृति या 'रिंग ऑफ फायर' की तरह का नजारा देखने को मिलेगा। सूर्य ग्रहण खंडग्रास होगा। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रोलॉजर्स सोसाइटी (AIFAS) के कानपुर चैप्टर के चेयरमैन और इसी संस्था के यूपी के गवर्नर पंडित शरद त्रिपाठी ने इस ग्रहण के बारे में कई खास बातें बताई हैं, जानते हैं उनके बारे में...

उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि को होता है और इस बार 26 दिसंबर को पौष माह को कानपुर के समय के अनुसार, ग्रहण का स्पर्श आठ बजकर 19 मिनट से होगा, कंकणाकृति (रिंग ऑफ फायर) सुबह 9.06 बजे से दिखेगी, ग्रहण का मध्य 09.36 मिनट पर होगा और 11.06 पर मोक्ष होगा। सूतक काल ग्रहण के 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण खत्म होने तक रहता है। पंडित शरद त्रिपाठी ने बताया कि कांकणाकार सूर्य ग्रहण की स्थिति में चंद्रमा सूर्य को 91.93 फीसद तक ढंक लेता है।

हालांकि, पूरे भारत में यह नजारा देखने को नहीं मिलेगा। भारत के दक्षिणी शहरों जैसे- मदुरै, कोयम्बटूर और कोझिकोड में इस ग्रहण के नजारे को पूरी तरह से देखा जा सकेगा। बताते चलें कि जब सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तो सूर्य ग्रहण होता है।

इन राशियों पर होगा असर

मेष, मिथुन, कर्क, सिंह और वृश्चिक, धनु, मकर और मीन राशियों के लिए ग्रहण खराब रहेगा। बाकी चार राशियों वृष, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस ग्रहण से लाभ मिल सकता है। यह ग्रहण धनु राशि पर होगा, जिसमें पहले से ही छह ग्रह एक साथ मौजूद होंगे। भारत की कुंडली को अगर देखें, तो उसके अष्टम भाव में धनु राशि पड़ेगी, जिसमें ग्रहण होने की वजह से अंदरूनी शत्रुओं को बढ़ावा मिल सकता है। देश के अंदर की पुरानी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

लिहाजा, कोई ऐसी समस्या सामने अचानक आ सकती है, जो देश के लिए अच्छा नहीं होगा। संसद के शीतकालीन सत्र में नेता अपनी मर्यादाओं को भूल कर स्तर से नीचे गिर सकते हैं। धनु राशि धर्म की राशि है, लिहाजा देश में धार्मिक गिरावट और नैतिकता में पतन हो सकता है। वहीं, 25 दिसंबर को बड़ा दिन कहते हैं, जहां से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। इसके अगले दिन ग्रहण होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देशों के बीच स्थिति अच्छी स्थिति नहीं रहेगी।

अमावस्या के दिन करें यह काम

AIFAS के कानपुर चैप्टर से असिस्टेंट प्रोफेसर शील गुप्ता ने बताया कि हर अमावस्या का दिन पितृों को याद करने का, उनके निमित्त दान निकालने का होता है, ताकि उनकी कृपा परिवार पर बनी रहे। इस दिन तर्पण और श्राद्ध कर्म करना चाहिए और नदी में स्नान करना चाहिए। ग्रहण के समय मंत्र जाप करना चाहिए। अमावस्या के दिन दोपहर 12 बजे श्वेत वस्त्र मिष्ठान पुरखों के निमित्त अवश्य निकालना चाहिए।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai