गौरांग दास प्रभु भारत के जाने-माने अध्यात्म गुरु हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर समाज में अपना योगदान दिया है और विभिन्न मंचों पर इस्कॉन की शिक्षाओं को बढ़ावा दिया है। इस्कॉन, मुंबई से जुड़े गौरांग दास प्रभु आईआईटी स्नातक होने के साथ ही नेतृत्व सलाहकार, कॉरपोरेट कोच, प्रेरणादायक वक्ता, पर्यावरण कार्यकर्ता, समाज सुधारक, आध्यात्मिक नेता, शिक्षक और शिक्षाविद हैं।
श्री कृष्ण को अर्पित किए अपने तमाम वचनों के माध्यम से गौरांग प्रभु से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तमाम कृष्ण भक्त जुड़े हुए हैं, जो उनके बताए रास्ते पर चलते हैं। देश के पहले बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म, कू ऐप से भी गौरांग प्रभु जनवरी 2022 में जुड़े थे। प्लेटफॉर्म से जुड़ने के महज़ आठ महीनों में 1.61 लाख फॉलोअर्स हासिल करना, उनकी प्रसिद्धि का बखूबी बखान करता है। वह कू ऐप पर बेहद सक्रिय हैं और निरंतर रूप से श्रीमद्भगवद्गीता से मिलने वाली महत्वपूर्ण शिक्षा लोगों को देते हैं। श्री कृष्ण द्वारा सिखाई गई बातें और नेक विचार वह वीडियो आदि के माध्यम से यूज़र्स के साथ साझा करते हैं।
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गौरांग दास कई प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों, मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट्स और यहाँ तक कि जेलों आदि में भी में श्रीमद्भगवद्गीता के सम्मेलन आयोजित कर चुके हैं। वर्तमान समय में गौरांग प्रभु इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) के लिए एक वैश्विक सेवा अधिकारी हैं। साथ ही वे इस्कॉन जीबीसी कॉलेज के ट्रस्टी, जीबीसी ऑर्गनाइज़ेशनल डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य और जीबीसी नॉमिनेशन कमेटी, दुनिया भर में इस्कॉन मंदिरों में भक्त देखभाल और मंदिर विकास, सिस्टम और प्रशासन विभागों के मंडल निदेशक हैं। वे भक्तिवेदांत अनुसंधान केंद्र (बीआरसी), कोलकाता के एडमिनिस्ट्रेटर और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में भी कार्यरत हैं।
इतना ही नहीं, गौरांग दास जी यूनाइटेड नेशंस वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गनाइज़ेशन (यूएनडब्ल्यूटीओ) पुरस्कार विजेता गोवर्धन इकोविलेज के डायरेक्टर और इस्कॉन चौपाटी मंदिर के को-चेयर हैं। समाज के निचले क्षेत्रों में सुधार के लिए सामाजिक कार्य के चलते गौरांग दास ने वर्ष 2005 में पांच मनुष्यों और आठ मवेशियों के साथ गोवर्धन इकोविलेज की नींव रखी थी। वर्ष 2020 तक के आँकड़ों के अनुसार गाँव से जुड़े 250 लोग और 100 मवेशी गोवर्धन इकोविलेज का हिस्सा हैं। गौरांग दास द्वारा गोवर्धन इकोविलेज में एक ग्रामीण विकास योजना भी शुरू की गई, जिसमें महिलाओं का सशक्तिकरण शामिल है। इस पहल ने आदिवासी गाँवों में 12,000 से अधिक परिवार के सदस्यों को प्रभावित किया है।