प्रयागराज। कुंभ मेले में रविवार सुबह उस वक्त भगदड़ की नौबत आ गई, जब भारी भीड़ के चलते स्नानार्थियों को आगे जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। इसी दौरान शाही स्नान के लिए जा रहे संतों का जुलूस आ गया तो अफरा-तफरी मच गई। भीड़ के दबाव में कई महिलाएं और पुरुष गिरकर घायल हो गए।

पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने किसी तरह स्थिति को संभाला। इसके बाद आनन-फानन में पांटून पुल नंबर चार खोल दिया गया।

सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पुल पर पहुंच गए तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। वसंत पंचमी पर शाही स्नान के लिए पांटून पुल नंबर एक से आठ तक स्नानार्थियों के लिए बंद कर दिया गया है।

संगम और झूंसी की तरफ भी जाने पर रोक लगा दी गई थी, जबकि मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला लगातार आता रहा। काली मार्ग व दूसरे रास्तों से आने वाले हजारों स्नानार्थी पुल नंबर चार के पास पहुंच गए तो आगे जाने से रोक दिया गया। दूसरे पुल भी बंद थे। ऐसे में सभी श्रद्धालु पुल के पास जमा हो गए।

कुछ देर बाद उधर से अखाड़ों का जुलूस निकला तो हालात बिगड़ गए। निर्मोही अखाड़े का जुलूस जैसे ही आगे बढ़ा भगदड़ की नौबत आ गई। कुछ श्रद्धालु इधर-उधर कूदने भी लगे।

यह देख एडिशनल एसपी सुरक्षा व अखाड़ा आशुतोष मिश्रा ने तुरंत जवानों को अलर्ट करते हुए कार्डन बनवाया। आनन-फानन बंद पुल भी खोल दिया गया। करीब 15 मिनट में भीड़ का दबाव कम हुआ तो अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

भीड़ के दबाव में टूटने से बची बैरिकेडिंग संगम नोज के पास वसंत पंचमी पर भीड़ के दबाव में बेरिकेडिंग भी टूटने से बच गई। सुबह करीब छह बजे अचानक श्रद्धालुओं का रेला एकाएक टूट पड़ा तो गंगा में भीड़ बढ़ गई।

कुछ स्नानार्थी डीप वाटर बैरिकेडिंग को पकड़कर नहाने लगे तो उनके बीच धक्का मुक्की होने लगी, तभी वहां टीम के साथ मुस्तैद प्रभारी जल पुलिस कड़ेदीन यादव नाव से पानी में कूद पड़े और श्रद्धालुओं को हटवाया।

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