Nishant Saxena Success story । आज के समय में परंपरागत खेती कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रही है। एक तरफ जहां किसान कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रासायनिक खेती को जलवायु प्रदूषण एवं मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करने का दोषी भी माना जा रहा है। यही कारण है कि कई किसान खेती छोड़कर दूसरे व्यवसायों की ओर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी कुछ ऐसे जागरूक युवा हैं तो आधुनिक तरीके से प्राकृतिक और जैविक खेती करके खेती से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे ही एक जागरूक युवा किसान हैं निशांत सक्सेना, जिन्होंने अपनी लाखों रुपए की नौकरी को छोड़कर अब जैविक खेती कर रहे हैं और उम्मीद से ज्यादा सफलता भी हासिल कर रहे हैं। निशांत सक्सेना नीदरलैंड जैसे विकसित देश में सॉफ्टवेयर कंपनी में ऊंचे पद पर काम कर रहे थे, लेकिन अपनी जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाने के उद्देश्य से भारत लौट आए और अब जैविक खेती कर रहे हैं।

7 एकड़ जमीन खरीदकर शुरू की जैविक खेती

शिक्षाविदों के परिवार से आने वाले निशांत ने अपनी शुरुआती शिक्षा बिलासपुर से पूरी की। इसके बाद Delhi College of Engineering से स्नातक की डिग्री हासिल की। Infosys जैसी नामी सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ अपना आईटी सेक्टर में करियर शुरू किया। 8 सालों तक अलग-अलग शहरों में काम करने के बाद नीदरलैंड की ख्यात Erasmus University के Rotterdam School of Management से MBA किया और पर्यावरण संरक्षण के बारे में अध्ययन किया और रासायनिक खेती के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जाना। आखिरकार खेती करने के उद्देश्य से भारत लौट आए और खेती करने के लिए कृषि भूमि की खोज शुरू कर दी।

बजट में नहीं मिली उपजाऊ भूमि, खरीद ली पथरीली भूमि

निशांत को अपने बजट में जब खेती के लिए उपजाऊ नहीं मिली तो उन्होंने 7 एकड़ वाली कम उपजाऊ जमीन (पथरीली भूमि) खरीद ले और प्राकृतिक तरीके से खेती करना शुरू कर दी। निशांत ने बताया कि उनके पिता पेशे से प्रोफेसर रहे हैं और विदेशों में भी कई विश्वविद्यालय में पढ़ा चुके हैं। वे भी पहले कृषि कर चुके थे और उनके मार्गदर्शन में खेती करना शुरू किया। परिवार के सहयोग से पिता-पुत्र ने शुरुआत में दलहन एवं तिलहन की फसलों जैसे तिल, सोयाबीन, अरहर, मूंग आदि की बुवाई की और अच्छा मुनाफा कमाया।

खेत की मेड़ पर लगाए 1000 सागौन

खेती करने के साथ-साथ निशांत ने अपने खेती की मेड़ पर 1000 सागौन के पेड़ भी लगाए हैं। इसके लिए उन्होंने रूट शूट तकनीक का इस्तेमाल किया। निशांत बताते हैं कि इन विधि के तहत सागौन के पौधों की जड़े भूमि में 6 इंच गहरे और 1 इंच चौड़े छिद्र में रोपित की जाती हैं| ऐसा करने से वृक्ष के अंकुरण एवं जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

निशांत की जैविक फसलों की अच्छी डिमांड

निशांत ने जो 7 एकड़ पथरीली भूमि खरीदी थी और जैविक खाद, गोबर का खाद, पौधारोपण आदि करके जमीन की क्वालिटी में भी सुधार किया है और अब धीरे-धीरे उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है। फिलहाल निशांत अपने खेत में सिर्फ जैविक तरीके से ही खेती कर रहे हैं और उनके खेत में पैदा होने वाले जैविक उत्पादों में अनाज के अलावा सब्जियां भी शामिल हैं, जिनकी अच्छी डिमांड है।

खेत में लगाए हैं उन्नत किस्म के फलदार पौधे

निशांत निकट भविष्य में जैविक तरीके से फलोत्पादन भी करना चाहते हैं। खेती करने के साथ साथ उन्होंने फार्म में फलदार वृक्ष जैसे आम, फालसा, रामफल, शहतूत आदि का रोपण भी किया है और कुछ ही सालों में इनसे भी कमाई शुरू होने की उम्मीद है। खेत को पर्माकल्चर पद्धति से विकसित किया गया है, जिसमें फलदार वृक्ष, शाक, सब्जियों और अन्य फसलों का संयोजन प्राकृतिक तरीके से किया जाता है | इस पद्धति से जुताई एवं निराई, गुड़ाई में ज्यादा नहीं करना पड़ता है।

मत्स्य पालन व गो पालन के साथ अपनाएं समेकित कृषि प्रणाली

निशांत सक्सेना खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन व गो पालन के जरिए संपूर्ण समेकित कृषि प्रणाली पर काम करना चाहते हैं। निशांत का कहना है कि आज किसान को सिर्फ फसल उत्पादन पर ही आश्रित नहीं रहना चाहिए। खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाकर किसान जहां समय की बचत कर सकता है और उसी समय में खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों में निवेश कर अपनी कमाई कर सकता है। लेकिन विडंबना ये है कि किसान सिर्फ फसल उत्पादन पर ही निर्भर है।

Posted By: Sandeep Chourey