नई दिल्ली। शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस की एसआइटी (विशेष जांच दल) ने सवा चार साल बाद सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दायर की। एसआइटी ने आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा के तहत चार्जशीट दायर की है।

करीब 3000 पेज की चार्जशीट में एसआइटी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर को मुख्य संदिग्ध आरोपित माना है। उन्हें कॉलम नंबर 11 में रखा गया है। इस कॉलम में आरोपित को रखने पर बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट दायर की जा सकती है।

सुनंदा की मौत मामले में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में केस दर्ज किया गया था, लेकिन जांच में एसआइटी को हत्या के सुबूत नहीं मिले। एसआइटी को जो सुबूत मिले हैं, उसके अनुसार सुनंदा को काफी प्रताड़ित किया जाता था और उनकी पिटाई की जाती थी। एसआइटी का मानना है कि थरूर की प्रताड़ना से तंग आकर सुनंदा ने खुदकशी की थी।

पटियाला हाउस कोर्ट चार्जशीट पर 24 मई को संज्ञान लेगा। उसी दिन कोर्ट शशि थरूर को समन जारी कर सकता है। एसआइटी के मुताबिक, आइपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) चार्जशीट में इसलिए शामिल की गई है, क्योंकि सुनंदा के शरीर पर चोट के 12 निशान मिले थे। इससे साफ पता चलता है कि थरूर ने सुनंदा के साथ मारपीट की थी। वहीं, धारा 498 ए इसलिए लगाई गई है, क्योंकि थरूर व सुनंदा का वैवाहिक जीवन काफी तनावपूर्ण था।

बता दें कि 17 जनवरी 2014 को चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में संदिग्ध परिस्थितियों में सुनंदा की मौत हो गई थी। इससे एक दिन पहले उनके और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच ट्विटर पर कथित बहस हुई थी। यह बहस शशि थरूर के साथ मेहर की बढ़ती नजदीकियों को लेकर हुई थी।

29 सितंबर 2014 को एम्स के मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि उनकी मौत जहर से हुई है। बोर्ड ने कहा था कि कई ऐसे रसायन हैं जो पेट में जाने या खून में मिलने के बाद जहर बन जाते हैं। लिहाजा, बाद में उनके वास्तविक रूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद एक जनवरी 2015 को अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद पुलिस ने सुनंदा के विसरा को जांच के लिए अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी की एफबीआइ की लैब भेजा था, लेकिन वहां भी जहर के बारे में पता नहीं लग सका था। सुनंदा की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस थरूर के घरेलू सहायक नारायण सिंह, चालक बजरंगी और दोस्त संजय दीवान का पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवा चुकी है।

थरूर ने ट्विटर पर दी प्रतिक्रिया-

"जो कोई भी सुनंदा को जानता था, उसे यह बात पता है कि अकेले मेरे उकसाने से वह खुदकशी नहीं कर सकती। सवा चार साल की जांच के बाद दिल्ली पुलिस का ऐसे नतीजों पर पहुंचना उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। 17 अक्टूबर 2017 को दिल्ली हाई कोर्ट में जांच अधिकारी ने बयान दिया था कि इस केस में उन्हें किसी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है। अब छह महीने बाद वह कह रहे हैं कि मैंने खुदकशी के लिए उकसाया है। यह अविश्वसनीय है।"

''इस केस से जुड़े सभी गवाहों और दस्तावेजों को संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार और भ्रष्ट पुलिस ने नष्ट कर दिए थे। वर्तमान साक्ष्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल हुई है। ट्रायल के दौरान सभी सूचनाएं सामने खुलकर आएंगी।''

-सुब्रमण्यम स्वामी, भाजपा नेता

कब-कब क्या-

17 जनवरी 2014-सुनंदा पुष्कर दिल्ली के लीला होटल के एक कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलीं।

एक जनवरी 2015-दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया।

6 जुलाई 2017-भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी मामले की जांच एसआइटी से कराए जाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट गए।

26 अक्टूबर -हाई कोर्ट ने स्वामी की याचिका खारिज की।

29 जनवरी 2018-सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली।

23 जनवरी-सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर दिल्ली पुलिस का जवाब मांगा।

20 अप्रैल-सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत मांगी।

14 मई-दिल्ली पुलिस ने चार साल बाद मामले में चार्जशीट दाखिल की।

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