Sunspot : सूरज की सतह पर इन दिनों परिवर्तन का दौर चल रहा है। इसमें बड़ा धब्बा (सन स्पॉट) दिखाई दे रहा है। सन स्पॉट से निकलने वाली सोलर फ्लेयर्स (छोटी ज्वालाएं) पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रही हैं। इससे आयनोस्फीयर (पृथ्वी का बाहरी भाग) प्रभावित हो रहा है। इस तरह के खगोलीय बदलाव 10-11 सालों में देखने को मिलते हैं। आशंका है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन और प्रोट्रॉन अचानक घट अथवा बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञ इसे खगोलीय घटना बता रहे हैं। sunspot AR2770 के फैलने और सीधे पृथ्‍वी की ओर मुड़ने की संभावनाएं हैं। इसके पृथ्‍वी की तरफ आने का मतलब है यहां महत्‍वपूर्ण कनेक्टिविटी का ठप हो जाना, जैसे बिजली, मोबाइल नेटवर्क आदि। यदि यह सनस्पॉट व्यास में 50,000 किलोमीटर तक बढ़ता है, तो यह सौर flares में बदल जाएगा जिससे संचार माध्‍यमों को नुकसान हो सकता है। यह पॉवर ग्रिड, सैटेलाइट, रेडियो संचार, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) को प्रभावित कर सकता है। खगोलविद् व जवाहर तारामंडल के निदेशक डॉ. वाई रवि किरन ने नेशनल ओसिएनिक एंड एटमास्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि कभी-कभी कुछ स्थानों पर तापमान करीब चार हजार डिग्री सेल्सियस हो जाता है। ऐसे स्थान ही सन स्पॉट कहलाते हैं। नाभिकीय संलयन की क्रिया से सूर्य में ऊर्जा पैदा होती है। तापमान करीब छह हजार डिग्री सेल्सियस होता है।

सूर्य का 11 साल का चक्र

अध्ययनों से पता चला है कि सूर्य का अपना 11 साल का चक्र होता है। इस दौरान उसकी सतह पर बदलाव होते हैं। इन दिनों वैसी ही प्रक्रिया चल रही है, सूर्य अपनी धुरी पर 27 दिन में एक चक्कर पूरा करता है। जिस भाग में अभी सन स्पॉट है, वह पृथ्वी की तरफ है। डॉ. वाई रवि किरन कहते हैं कि अगले करीब 10 दिन तक यह सन स्पॉट देखा जा सकेगा। इस बदलाव को प्रोजेक्टर पर टेलीस्कोप की मदद से देखना चाहिए। सीधे तौर पर खुली आंख से देखना नुकसानदेह हो सकता है।

उभरने वाला है तीसरा सौर कलंक

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी भी कुछ इसी तरह की बात करते हैं। वह बताते हैं कि सूर्य पर दो सन स्पॉट यानी सौर कलंक उभर आए हैं। आकार में बहुत छोटे होने के कारण सन स्पॉट से कितनी ज्वालाएं उभरेंगी, अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। तीसरा सौर कलंक भी उभरने वाला है। ऐसे में विज्ञानियों की नजर सूर्य पर बनी हुई है।

15 अगस्त की रात वीनस व चंद्रमा एक साथ होंगे

खगोल विज्ञानी डॉ. शशिभूषण पांडे बताते हैं कि स्वतंत्रता दिवस के उल्लास के बीच 15 अगस्त की रात ही सौर परिवार के खूबसूरत ग्रह वीनस व चंद्रमा एक साथ होंगे। दोनों अपने सर्किंल से गुजरते हुए एक दूसरे से करीब तीन डिग्री आभासीय दूरी पर नजर आएंगे। यह नजारा दर्शनीय होगा। पूरी रात दोनों एक साथ सफर तय करेंगे।

बृहस्पति व चंद्रमा का दुर्लभ मिलन दूसरा मिलन सौर परिवार के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति व चंद्रमा का होगा। इसी के परिणाम स्वरूप 30 अगस्त की रात चंद्रमा का गोल्डन हैंडिल देखने को मिलेगा। इसमें चंद्रमा के एक हिस्से में हैंडिल के आकार का उभार दिखेगा। यह चंद्रमा का पर्वतीय हिस्सा है, जिसे नग्न आंखों से भी देखा जा सकता है। इसी क्रम में 31 की रात भी आतिशबाजी देखने को मिलेगी।

Posted By: Navodit Saktawat

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