नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मसले पर सुनवाई करते हुए मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस आरक्षण को पूर्ववर्ती प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने इस मामले पर दो हफ्ते बाद सुनवाई करने का कहा है।

10 जून को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल में मराठा छात्रों के एडमिशन में आरक्षण मामले में कोई बदलाव न करने की बात कही थी। कोर्ट ने कहा था कि पिछले आदेश में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है

पिछले साल लागू हुआ था मराठा आरक्षण

पिछले साल 30 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) श्रेणी के तहत मराठों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया था। आरक्षण को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गईं, जबकि कुछ अन्य कोटे के समर्थन में दायर की गईं।

सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि आरक्षण केवल मराठा समुदाय के उन लोगों को दिया गया जो लंबे समय से उपेक्षित हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 जून को मराठा समुदाय के लिए नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण के लिए राज्य सरकार के फैसले पर मुहर लगाई थी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी।