नई दिल्ली। Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने चेक या डिमांड ड्राफ्ट की वैधता अवधि की गणना में कोविड 19 की वजह से लागू लॉकडाउन के समय को निकालने की याचिका खारिज कर दी है। रिजर्व बैंक ने नवंबर 2011 में इस बारे में निर्देश जारी किया था। केंद्रीय बैंक ने 4 नवंबर 2011 को जारी निर्देश में कहा था कि एक अप्रैल 2012 से बैंक चेक, ड्राफ्ट, पे ऑर्डर, बैंकर्स चेक का भुगतान उस पर अंकित तारीख के 3 महीने बाद नहीं कर कर सकते हैं।

जस्टिस आर भानुमति की पीठ ने इस मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की। पीठ ने कहा कि याचिका में जो मुद्दा उठाया गया है वह नीतिगत फैसला है और अदालत इस तरह के मुद्दों पर कोई निर्देश जारी नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में लॉकडाउन की अवधि को चेक की वैधता के समय में शामिल नहीं करने का निर्देश देने की अपील की थी।

पीठ ने ये भी कहा कि चूंकि ये रिजर्व बैंक द्वारा लिया गया फैसला है इसलिए न्यायालय इसे लेकर कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता। ऐसे में पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

दरअसल लोगों ने हर बार की तरह विभिन्न कार्यों के लिए चेक और डिमांड ड्राफ्ट का उपयोग किया था। लेकिन मार्च के मध्य से देशभर में लॉकडाउन लागू हो गया। 2 महीने से ज्यादा की अवधि लॉकडाउन की रही, ऐसे में लोग इन चेक और ड्राफ्ट का उपयोग नहीं कर पाए और अब इनकी तिथियां निकल गईं। इसे देखते हुए ये याचिका दायर की गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने तमाम तर्कों और दलीलों के बाद इसे खारिज करने का फैसला किया। अदालत का मानना है कि नीतिगत फैसलों को इस तरह तुरंत बदला नहीं जा सकता।

Posted By: Rahul Vavikar

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