नई दिल्ली। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री को हिरासत में रखा गया है। इसे लेकर MDMK प्रमुख वाईको द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए कहा है कि उपयुक्त अथॉरिटी के सामने याचिका लगाई जाए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। ऐसे में संबंधित अथॉरिटी के पास ही इस आदेश को चुनौती दी जाए।

83 साल के फारूक अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के खिलाफ उनके 4 दशक पुराने मित्र MDMK चीफ वाईको द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। फारूक की गिरफ्तारी को लेकर जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से कोर्ट में जवाब दिया गया था कि उन्हें जम्मू कश्मीर के पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। वाईको ने फारूक की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की थी।

यह है पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA)

जम्मू कश्मीर का पब्लिक सेफ्टी एक्ट सबसे पहले प्रदेश में लकड़ी की स्मगलिंग को रोकने के लिए लाया गया था। इस एक्ट के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना कोर्ट ट्रायल के 2 साल तक पुलिस हिरासत में रख सकती है। शुरुआत में यह 16 साल से ऊपर के व्यक्ति के लिए लागू किया गया था, हालांकि साल 2011 में उम्र बढ़ाकर 16 से 18 साल कर दी गई थी।

लगभग एक दशक बाद इस एक्ट का इस्तेमाल आतंकियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों के खिलाफ किया जाने लगा था।

साल 2016 में हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बिगड़े हालातों के बाद सरकार ने 550 से ज्यादा लोगों के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की थी।

इस साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह पहला मौका है जब किसी मुख्यधारा के राजनेता के खिलाफ इस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

Posted By: Neeraj Vyas