मल्टीमीडिया डेस्क। भारतवर्ष में आदि-अनादि काल से गुरु-शिष्य परंपरा का सिलसिला चलता आ रहा है। गुरुओं के ज्ञान के प्रकाश से भारत लंबे समय तक विश्वगुरू बना रहा। दुनिया के कई अविष्कारों की जननी भारतभूमि रही है और यहां के शिक्षकों की ख्याति सात समंदर पार तक रही है। लेकिन हिंदुस्तान में कुछ शिक्षक ऐसे भी रहें जिनके ज्ञान और कार्यों की वजह से बरसों बाद भी वो जनमानस की यादों में बसे हुए हैं। आइए बात करते हैं कुछ यादगार काम करने वाले महान शिक्षकों की।

चाणक्य

इतिहास में चाणक्य का नाम उनके कई गुणों की वजह से दर्ज है। वे एक ऐसे शिक्षक थे जिनके पास युद्ध लड़ने की कला के साथ सामान्य जिंदगी को जीने के बेहतर गुण भी थे। चाणक्य का जन्म ईसापूर्व 375 में हुआ था। मगध के शासक धनानंद से अपमानित होने के बाद उन्होंने एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को अपना शिष्य बनाया और उसको शस्त्र और शास्त्र में निपुण बनाकर धनानंद को हटाकर मगध का राजा बना दिया। उन्होंने अखंड भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए कई बड़े फैसले किए। चाणक्य का निधन 283 ईसा पूर्व हुआ था।

रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस आधुनिक भारत के महान संत, दार्शनिक और गुरु थे। उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर गांव में हुआ था और इनके बचपन का नाम गदाधर था। 1856 में उनको दक्षिणेश्वर काली मंदिर का पुजारी नियुक्त किया और यहां से उनकी जिंदगी बदल गई। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने अपना जीवन मां काली को समर्पित कर दिया।

1859 में 23 साल के रामकृष्ण का विवाह 5 साल की शारदा से हुआ और 18 साल की होने पर वो उनके साथ रहने लगी। कुछ समय बाद उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया। उनके शिष्यों में स्वामी विवेकानंद, केशवचंद सेन, ईश्वरचंद विद्यासागर और महेंद्रनाथ गुप्त प्रमुख थे। 16 अगस्त 1886 को वे ब्रह्मलीन हो गए और पीछे छोड़ गए ज्ञान की अनमोल धरोहर।

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ने उस वक्त दुनिया को भारत के ज्ञान, प्रतिभा और उसकी अदभुत शक्ति से परिचित करवाया था जब दुनिया हिंदुस्तान को साधुओं और सपेरों के देश के रूप में देखती थी। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। वे स्वाामी रामकृष्ण परमहंस के महान शिष्य थे और उन्होंने अपने गुरु की धरोहर को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया था। उच्च शिक्षा लेने के बाद वह 25 साल की उम्र में संन्यासी बन गए थे। उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि 1893 का शिकागों में हुआ विश्व धर्म सम्मेलन था। स्वामी विवेकानंद की मृत्यु 4 जुलाई 1902 को हुई थी।

रामदास समर्थ

रामदास समर्थ मुगल वंश को कड़ी टक्कर देकर उसकी नीव हिलाने वाले मराठा शासक शिवाजी महाराज के गुरु थे। उनका जन्म 1608 में हुआ था। 12 साल की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया, लेकिन विवाह मंडप को छोड़कर वो संन्यास की राह पर निकल पड़े। 12 साल तक उन्होंने कठोर तप किया और 24 साल की उम्र में उनको आत्मज्ञान हुआ था। शिवाजी महाराज ने उनकी छत्रछाया में मराठा साम्राज्य की स्थापना की। 1603 में 73 साल की उम्र मे वो समाधिस्थ हो गए।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन

सर्वपल्ली राधाकृष्णन ज्ञान के महासागर थे। शिक्षा से उनको गहरा लगाव था। डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी गॉव में हुआ था। राधाकृष्णन की आर्थिक हालात ठीक ना होने पर भी उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और एक महान शिक्षक और दार्शनिक बनें प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक बने। देश आज भी उनको महान शिक्षाविद और दार्शनिक के रूप में याद करता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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