अंग्रेजों के खिलाफ भारत में पहला विद्रोह कब हुआ? इस प्रश्न के उत्तर के रूप में इतिहास की किताबों से लेकर पाठ्यपुस्तकों तक में यही लिखा मिलता है कि 'सन् 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति हुई"।

जरा ठहरिए और अपनी जानकारी को दुरुस्त कीजिए कि 1857 के महान विद्रोह से 40 साल पहले सन् 1817 में ही अंग्रेजों के खिलाफ पहला सशस्त्र विद्रोह किया जा चुका था। इसे किया था खुर्दा राज्य (वर्तमान ओडिशा) के राजा जगद्बंधु बिद्याधर महापात्रा ने। मगर अंग्रेजों व आजाद भारत के बाद इतिहास लिखने वालों ने षड्यंत्रपूर्वक इस तथ्य को इतिहास की पुस्तकों से गायब कर दिया।

किस्सा कुछ यूं है कि अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए सन् 1813 में उड़ीसा (अब ओडिशा) क्षेत्र के राज्य खुर्दा पर कब्जा करना शुरू किया। 1814 में वहां के किले 'रोरांग" पर कब्जा कर लिया। इस पर उस क्षेत्र के 'राजा बख्शी जगद्बंधु बिद्याधर महापात्रा भरमबार रे" ने सशस्त्र विद्रोह कर अंग्रेजों को खदेड़ने की रूपरेखा बनाई। उन्होंने अपनी सेना (जिसे पाइका कहा जाता था) को तैयार किया। पाइका लड़ाके हर तरह के युद्ध में कुशल थे और दुश्मन सेना पर टूट पड़ते थे। उन लड़ाकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध पहला विद्रोह छेड़ते हुए जबरदस्त हमला किया और अंग्रेजों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उस तेजतर्रार हमले से हालात ऐसे हो गए कि अंग्रेजों के पांव उखड़ने लगे।

मगर फिर अंग्रेजों ने वही रणनीति अपनाई, जिसके बलबूते उन्होंने भारत पर 200 वर्षों तक शासन किया। अंग्रेजों ने भारत की ही अन्य रियासतों के राजाओं को लालच दिया कि यदि वे अंग्रेजों का साथ देंगे, तो अंग्रेज सेना दुश्मन राजाओं से उनकी रक्षा करेगी। इसी तरह के और लालच दिए गए। अंतत: वही हुआ, जिसका अंदेशा था। कई राजाओं ने अंग्रेजों का संधि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इससे उन राजाओं की सेना अंग्रेजों की मदद करने को बाध्य हो गई। इस तरह भारत के ही राजाओं की सेना के बलबूते अंग्रेजों ने महापात्रा भरमबार की वीर पाइका सेना को हरा दिया। इस तरह यह विद्रोह नाकाम हो गया।

(अभय मराठे लिखित 'ओ उठो क्रांतिवीरो" से साभार)

Posted By: Arvind Dubey

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