प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जलियावाला बाग के सौंदर्यीकरण का उद्धाटन किया। पीएम ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें कई बार जलियांवाला बाग आने का अवसर प्राप्त हुआ। यहां जो अलग-अलग गैलरी बनाई गई हैं वह हमें उस कालखंड में लेकर जाती हैं। नरसंहार से पहले यहां बैसाखी के मेले लगते थे। यह स्थान नई पीढ़ी को हमारी आजादी की यात्रा कैसी रही यह जानकारी देगा। यहां तक पहुंचने के लिए हमारे पूर्वजों ने क्या किया किया, कितना त्याग, कितना बलिदान, कितनी कुर्बानियां दी। राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्य क्या होने चाहिए। कैसे हमें अपने हर काम में देश को सबसे ऊपर रखना चाहिए, इसकी भी प्रेरणा नई ऊर्जा के साथ इसी स्थान से मिलेगी।यहां पढ़ें उनके भाषण के मुख्‍य अंश।

- पंजाब की वीर भूमि को, जलियांवाला बाग की पवित्र मिट्टी को, मेरा प्रणाम! मां भारती की उन संतानों को भी नमन, जिनके भीतर जलती आज़ादी की लौ को बुझाने के लिए अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं।

-वो मासूम बालक-बालिकाएं, वो बहनें, वो भाई, जिनके सपने आज भी जलियांवाला बाग की दीवारों में अंकित गोलियों के निशान में दिखते हैं। वो शहीदी कुआं, जहां अनगिनत माताओं-बहनों की ममता छीन ली गई, उनका जीवन छीन लिया गया। उन सभी को आज हम याद कर रहे हैं।

- 13 अप्रैल 1919 के वो 10 मिनट, हमारी आजादी की लड़ाई की वो सत्यगाथा बन गए, जिसके कारण आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना पा रहे हैं। ऐसे में आज़ादी के 75वें वर्ष में जलियांवाला बाग स्मारक का आधुनिक रूप देश को मिलना, हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा का अवसर है।

- जलियांवाला बाग वो स्थान है जिसने सरदार उधम सिंह, सरदार भगत सिंह जैसे अनगिनत क्रांतिवीरों, बलिदानियों, सेनानियों को हिंदुस्तान की आजादी के लिए मर-मिटने का हौसला दिया।

- किसी भी देश के लिए अपने अतीत की ऐसी विभीषिकाओं को नजरअंदाज करना सही नहीं है। इसलिए, भारत ने 14 अगस्त को हर वर्ष ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

- जलियांवाला बाग जैसी ही एक और विभीषिका हमने भारत विभाजन के समय भी देखी है। पंजाब के परिश्रमी और जिंदादिल लोग तो विभाजन के बहुत बड़े भुक्तभोगी रहे हैं। विभाजन के समय जो कुछ हुआ, उसकी पीड़ा आज भी हिंदुस्तान के हर कोने में और विशेषकर पंजाब के परिवारों में हम अनुभव करते हैं।

- आज दुनियाभर में कहीं भी, कोई भी भारतीय अगर संकट से घिरता है तो भारत पूरे सामर्थ्य से उसकी मदद के लिए खड़ा हो जाता है। कोरोना काल हो या फिर अफगानिस्तान का संकट, दुनिया ने इसे निरंतर अनुभव किया है। ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत अफगानिस्तान से सैकड़ों साथियों को भारत लाया जा रहा है।

Posted By: Navodit Saktawat