नई दिल्ली। भारत के ओडिशा स्थित तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान "तितली" ने तबाही मचाई है। शासन-प्रशासन की पूरी सतर्कता के बावजूद वो इस कहर को रोक नहीं सके। कहर बरसाने वाला ऐसा तूफान देश में पहली बार नहीं आया है। इसके पहले भी हुदहुद, फैलिन एवं कोरिंगा जैसे तूफान भारी तबाही मचा चुके हैं।

अगर देश ही बात करें तो 1839 में आंध्र प्रदेश में "कोरिंगा" नामक तूफान ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब तीन लाख लोगों की मौत हुई थी। उस वक्त की भयावहता की तस्वीरें तो नहीं नजर आईं, लेकिन कुछ स्कैच जरूर सामने आते रहे हैं। इससे मालूम होता है कि भारत का सामना पहले से ही तूफानों से होता रहा है। ऐसे ही कुछ तूफानों पर नजर डालते हैं, जो देश और दुनिया में तबाही मचा चुके हैं।

2018 : "तितली" से सहमा ओडिशा का तटीय इलाकाएक बार फिर ओडिशा-आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में लोग सहमे हुए हैं। यह दहशत "तितली" के आने का है। दरअसल, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव का क्षेत्र तीव्र होकर चक्रवाती तूफान "तितली" में बदल गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि चक्रवाती तूफान पिछले कुछ घंटे में आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। तितली ओडिशा में गोपालपुर से करीब 530 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में और आंध्रप्रदेश में कलिंगपट्नम से 480 किलोमीटर पूर्व- दक्षिण पूर्व में है। मौसम विभाग ने ओडिशा के कई स्थानों पर भयंकर बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताते हुए राज्य में रेड अलर्ट जारी किया है।

2014 : आंध्र और ओडिशा में "हुदहुद" का कहर8 और 12 अक्टूबर 2014 को ओडिसा व आंध्र प्रदेश में "हुदहुद" की दस्तक से दोनों राज्य सहम गए थे। एनडीआरएफ ने करीब चार लाख लोगों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया था। इस घटना में छह लोगों की मौत हुई थी। तूफान से विशाखापत्तनम समेत आंध्र प्रदेश के दो अन्य तटवर्ती जिलों श्रीकाकुलम और विजयनगरम में जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया था। चक्रवात की गति 170 से 195 किलोमीटर प्रतिघंटे थी। भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ की टीम ने राज्य को भारी तबाही से बचाया था।

2013 : "फैलिन" से सहमा आंध्र-ओडिशा12 अक्टूबर 2013 करीब 9 बजे तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवात "फैलिन" ने ओडिशा तट पर दस्तक दी थी। अंडमान सागर में कम दबाव के क्षेत्र के रूप में उत्पन्न हुए "फैलिन" ने नौ अक्टूबर को उत्तरी अंडमान निकोबार द्वीप समूह पार करते ही एक चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया था। इसने सबसे ज्यादा नुकसान ओडिशा और आध्र प्रदेश में किया था। चक्रवात की भीषणता को देखते हुए करीब छह लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया था।

तूफान का केंद्र रहे गोपालपुर से तूफान 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरा था। इस चक्रवात का असर बिहार व उप्र और छत्तीसगढ़ तक था। इस चक्रवात को फैलिन नाम (जिसका अर्थ होता है नीलम), थाईलैंड द्वारा दिया गया था। इस चक्रवात से 90 लाख लोग प्रभावित और 2.34 लाख घर क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि 2400 करोड़ रुपए की धान की फसल बर्बाद हो गई थी।

2004 : सुनामी से दहला भारतहिंद महासागर में 2004 में आई सुनामी का असर भारत सहित 14 देशों पर हुआ था। यह सुनामी सुमात्रा के पश्चिमी तट पर हाई थी। इससे मरने वालों की संख्या करीब 2,30,000 लाख से ज्यादा थी। यह सुनामी भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक थी।

1839 : "कोरिंगा" ने मचाई तबाही25 नवंबर 1839 को एक चक्रवात तूफान आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले के कोरिंगा से टकराया था, इसलिए इसका नाम "कोरिंगा" रख दिया गया। इसने भारत के पश्चिमी घाट पर भारी तबाही मचाई थी। समुद्र की 40 फीट ऊंची लहरों ने करीब तीन लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया। समुद्र में खड़े 20 हजार जहाजों के निशान तक नहीं मिले। 1789 में कोरिंगा एक और समुद्री तूफान टकराया था, जिसमें लगभग 20 हजार लोगों की मौत हुई थी।

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