Top News Today: बिहार और महाराष्ट्र की राजनीति पर आज पूरे देश की नजर है। बिहार में जहां नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारते दिख रहे हैं तो महाराष्ट्र में करीब एक महीने बाद एकनाथ शिंदे सरकार का कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। वहीं रक्षाबंधन का उत्साह भी साफ झलकने लगा है। बाजार सज चुके हैं। भीड़ में बढ़ गई है। वहींं मौसम का कहर जारी है। हालांकि कुछ राज्यों में राहत मिली है। खेलों में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन चर्चा में है। क्रिकेट में टीम इंडिया एशिया कप की तैयारी शुरू कर चुकी है। यहां पढ़िए आज की बड़ी खबरें....

श्रीकांत त्यागी पर नोएडा पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस

नोएडा पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मीडिया को बताया कि उसे पकड़ने में कितनी मशक्कत करनी पड़ी। उसे मेरठ के पास से गिरफ्तार किया था और अब कमिश्नर ऑफिस में लाया गया है। नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने बताया कि ये लगातार भागता रहा। पहले एयरपोर्ट पहुंचा, लेकिन पहचान लिए जाने के डर से मुजफ्फरनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि जगहों पर छिपता रहा।

श्रीकांत त्यागी मेरठ से गिरफ्तार, कोर्ट में किया जाएगा पेश

यूपी पुलिस ने आखिरकार श्रीकांत त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। गालीबाज श्रीकांत त्योगी को नोएडा पुलिस ने मेरठ से गिरफ्तार कर लिया है। अब उसे नोएडा लाया जा रहा है। पूछताछ की जाएगी और कोर्ट में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान ही पता चलेगा कि वह इतने दिनों तक कहां छिपा रहा और किसने उसे शरण दी। यूपी पुलिस ने श्रीकांत त्यागी पर 25,000 रुपए का इनाम घोषित किया था। श्रीकांत त्यागी को चार दिन तक शरण देने वाला नकुल त्यागी भी गिरफ्तार हुआ है। वह मेरठ के शास्त्री नगर का रहने वाला है। फरारी के दौरान नकुल त्यागी व ब्लाक प्रमुख बिल्लू की गाड़ी का प्रयोग श्रीकांत त्यागी ने किया था।

यहां भी क्लिक करें: UP: श्रीकांत त्यागी मामले में सरकार सख्त, सीएम योगी ने गृह विभाग से मांगी मामले की पूरी रिपोर्ट

मुफ्त वाली योजनाओं के पक्ष में आम आदमी पार्टी, SC में लगाई यह याचिका

आम आदमी पार्टी (AAP) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि चुनाव प्रचार के दौरान 'मुफ्तखोरी' का वादा करने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया जाए। अरविंद केजरीवाल की पार्टी का कहना है कि मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली, मुफ्त परिवहन जैसे चुनावी वादे मुफ्त नहीं हैं, लेकिन एक असमान समाज में बेहद जरूरी हैं। बता दें, इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ ही चुनाव आयोग, आरबीआई समेत अन्य पक्षों का रुख जाना है।

Posted By:

  • Font Size
  • Close