अरविंद,बोकारो। गाना बजाना और शुभ मौके पर बधाई देकर जीविकोपार्जन के लिए कमाना। यही किन्नर की पहचान है। बोकारो, झारखंड की एक किन्नर राजकुमारी ने अपनी पहचान को इससे कहीं अलग आयाम दे दिया है। नाम के अनुरूप उसकी पहचान बेहद संवेदनशील और सहयोग की भावना रखने वाले इंसान के तौर पर है। राजकुमारी अपनी कमाई का 75 फीसद दान कर देती हैं। खासकर गरीब लड़कियों की शादी में बढ़-चढ़ कर सहयोग करती हैं।

माराफारी थाना क्षेत्र के रितुडीह की रहने वाली राजकुमारी के दरवाजे पर जाने वाला कोई भी जरूरतमंद निराश होकर नहीं लौटता। मोहल्ले में झगड़ा हो अथवा घरेलू कलह, सभी मसलों को सुलझाने के लिए भी वह हाजिर रहती हैं। राजकुमारी ने पांच अनाथ लड़कियों को पाला-पोसा बड़ा किया। बड़े होने पर उनकी शादी कराई। राजकुमारी के दरवाजे पर अगर कोई गरीब दंपती बेटी की शादी के लिए मदद मांगने पहुंचता है तो वह हरसंभव मदद को तत्पर हो उठती हैं। कई बार राजकुमारी को बधाई देने पर अमीर परिवारों से गहने भी मिलते हैं। इनको वह सहेजकर रखती हैं और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में बतौर उपहार भेंट कर देती हैं।

गुरु राजकुमारी को इस नेक काम में उनकी एक दर्जन किन्नर शिष्याओं का भी सहयोग मिलता है। सभी मिलकर अब तक दर्जनों बेटियों की शादी में मदद कर चुके हैं। स्थानीय लोगों के साथ मिलजुलकर रहने वाली राजकुमारी का इलाके में समाजसेवा की वजह से बड़ा सम्मान है।

लोग आपसी झगड़े और घरेलू कलह को सुलझाने के लिए उनके पास ही आते हैं। राजकुमारी भी बतौर पंच पूरे मंथन के बाद सटीक फैसला सुनाती हैं। जिसे दोनों ही पक्ष स्वीकार करते हैं। मोहल्ले की नागरिक सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को लेकर भी वह अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक दौड़ लगाती हैं। ठंड में फुटपाथ पर पड़े गरीबों को कंबल ओढ़ाना और भूखे बच्चों को भोजन कराना उनकी दिनचर्या में शामिल है।

काफी कुरेदने पर राजकुमारी ने बताया कि चालीस वर्ष से अधिक समय गुजर गया इसी मोहल्ले में रह रही हूं। पांच लड़कियों की शादी कर कन्यादान का पुण्य कमा लिया है। ये लड़कियां वषोर् पहले लावारिस मिलीं थी। इनके माता पिता नहीं थे। उनका दर्द हमें झकझोर गया। हम भी इंसान हैं। बस उन्हें घर ले आए। पाला पोसा और पूरी शिद्दत से उनकी परवरिश की। बड़ी हो गईं तो शादी अच्छे घरों में कर दी। अब वे अपनी ससुराल में सुखी है। उनको खुश देख कलेजे को ठंडक मिलती है। हमारे लिए सब कुछ हमारी गुरु दुलाली किन्नर थीं। वे हमें बचपन में ले आईं थीं। उन्होंने हमेशा लोगों की सेवा की सीख दी थी। उनकी नसीहतों पर चल रही हूं।

हमारी कमाई का 25 फीसद हिस्सा ही हम लोगों के जीवनयापन को पर्याप्त है। नेकी करना तो ईश्वर की इबादत है। इसमें पीछे क्यों रहूं। -राजकुमारी देवी