राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कुछ प्रमुख शहरों में कोरोना संक्रमण की चाल पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि मार्च के बाद अचानक से संक्रमण के मामलों में वृद्धि हुई। दिल्ली में 15 मार्च को मात्र 368 संक्रमित पाए गए थे और तीन लोगों की मौत हुई थी। उस दिन संक्रमण की दर 0.59 फीसद थी। लगभग एक महीने बाद 19 अप्रैल को संक्रमितों की संख्या बढ़कर 23,686 और मृतकों की संख्या 240 हो गई। दिल्ली से सटे गाजियाबाद और नोएडा यानी गौतमबुद्धनगर में के आंकड़े भी कुछ यही कह रहे हैं। गाजियाबाद में 15 मार्च को मात्र सात मामले मिले थे और किसी की मौत नहीं हुई थी। संक्रमण की दर भी एक फीसद से कम थी। 19 अप्रैल को मामले बढ़कर 827 हो गए, लेकिन मरने वालों की संख्या मात्र दो ही थी, संक्रमण की दर भी 3.69 फीसद थी। 10 मई को 461 केस मिले हैं, चार लोगों की जान गई है, लेकिन संक्रमण की दर बढ़कर 18.03 फीसद हो गई है, यानी कम जांच में ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं। गौतमबुद्धनगर में 15 मार्च को दो मामले थे, कोई जान नहीं गई थी और संक्रमण दर 0.1 फीसद थी। 19 अप्रैल को 425 मामले मिले, तीन लोगों की जान गई और संक्रमण दर 8.5 फीसद पाई गई, लेकिन 10 मई को बढ़कर 1,026 हो गए हैं, 10 लोगों की मौत हुई और संक्रमण दर 16.5 फीसद हो गई है। साफ है मामले भले ही कम मिल रहे हों पर संक्रमण अभी तेजी से फैल रहा है। लखनऊ में हालात सुधरते नजर आ रहे हैं। 19 अप्रैल को 5,897 केस मिले थे, 22 लोगों की मौत हुई थी और संक्रमण दर 15.09 फीसद थी।

Posted By: Navodit Saktawat

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