बिजनौर। बिजनौर के मोहलड़वाला गांव में एक खेत में दुर्लभ सिक्के मिलने का मामला सामने आया है। एक किसान को यह सिक्के खेत में हल चलाने के दौरान मिले हैं। किसान ने सभी सिक्कों को घर लाकर भूसे में छिपा दिया। खेत पर काम करने वाले मजदूर ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने बुधवार को सिक्के बरामद कर लिए। तहसीलदार ने जब्त सिक्कों को में जमा कराने के लिए कलक्ट्रेट भिजवा दिया है।

सभी सिक्के डाकू सुल्ताना के इलाके से मिले हैं। सीओ के मुताबिक सभी सिक्के सफेद धातु और ब्रिटिश काल के हैं। पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ही धातु का सही पता चल पाएगा। सिक्कों पर 1862 से 1919 के बीच के साल अंकित हैं। बुधवार शाम सीओ सिटी एके सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि अलीपुर मोहलड़ निवासी मानसिंह ने हैजराबाद गांव निवासी सतीश का खेत बटाई पर ले रखा है। मानसिंह बारमपुर के जंगल में मजदूरों के साथ ईख की बोवाई कर रहा था। इस दौरान हल मिट्टी के बर्तन से टकराया। इससे बर्तन टूट गया और उसमें रखे सिक्के बिखर गए।

इन सिक्कों को वहां काम कर रहे मजदूर राजा ने उठा लिया। तभी मान सिंह ने राजा से सभी सिक्के छीन लिए। राजा ने नाराज होकर यह बात गांव में फैला दी। बुधवार को पुलिस ने गांव पहुंचकर मान सिंह से सिक्कों की बाबत पूछताछ की, लेकिन वह कुछ नहीं बोला। जब पुलिस उसे थाने ले जाने लगी तो उसकी बेटी ने बताया कि सिक्के भूसे में दबा रखे हैं। मान सिंह को पूछताछ करके मौके पर ही छोड़ दिया गया। इसके बाद तहसीलदार नगीना हामिद हुसैन मौके पर पहुंचे और सिक्के जब्त किए।

डाकू सुलताना का संबंध रहा है गांव से

इतिहासकारों के मुताबिक मुरादाबाद के हरथला गांव निवासी सुल्ताना 17 साल की उम्र में डकैत बन गया था। वह अंग्रेजी हुकूमत का खजाना लूटता था। उसका 100 डकैतों का गैंग था। गोंडा से लेकर सहारनपुर तक उसका आतंक था। नजीबाबाद के वीरान पड़े नवाब नजीबुद्दौला के भव्य किले में उसने अपना ठिकाना बनाया। 14 दिसंबर 1923 को उसे नजीबाबाद के जंगलों से गिरफ्तार किया गया। इसके एक साल बाद उसे फांसी दे दी गई। ग्रामीणों का मानना है कि बरामद सिक्के सुल्ताना डाकू के जमाने के हैं। इन्हें अंग्रेजी खजाने से लूटकर यहां छिपाया गया होगा। जिस स्थान से सिक्के मिले हैं, करीब सौ साल पहले सुल्ताना डाकू का इलाका था। यहां से सुल्ताना का ठिकाना महज 15 किमी दूर था। वह लूट का खजाना वह नजीबाबाद क्षेत्र के जंगल में छिपा देता था।

Posted By: Yogendra Sharma