मुस्लेमीन, रामपुर। तीन तलाक को लेकर जबसे केंद्र सरकार ने कानून बनाया है, तब से पीडि़त मुस्लिम महिलाओं में जागरूकता आई है। उनमें अब हिम्‍मत आ गई है और वे अपने साथ हुए अत्‍याचार के खिलाफ आवाज उठाना सीख गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि अब तीन तलाक से जुड़े मामलों की सुनवाई होने लगी है।

तत्काल तीन तलाक का कानून बनने के बाद पीड़ित महिलाओं को इन्साफ मिलने लगा है। थाने में उनकी रिपोर्ट दर्ज हो रही है और उत्पीड़न करने वालों को जेल भी भेजा जा रहा है। इससे पहले तीन तलाक के बाद महिलाएं भटकती रहती थीं। इसका श्रेय वे प्रधानमंत्री मोदी को दे रही हैं।

अब नहीं पहुंच रहे शरई अदालत में

पहले तत्काल तीन तलाक के मामले शरई अदालत में पहुंचते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। रामपुर की शरई अदालत के मुफ्ती मुहम्मद मकसूद कहते हैं कि कानून बनने के बाद तीन तलाक का कोई मामला नहीं आया है।कानून बनने के 50 दिन में रामपुर में 24 मुकदमे दर्ज हुए हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अब तत्काल तीन तलाक पीड़ित महिलाएं थाने पहुंच रही हैं। जिले में अब तक 24 रिपोर्ट दर्ज हुई है और तीन आरोपित जेल भेजे गए हैं।

हलाला के बावजूद मिला तीन तलाक

अजीमनगर थाने के डोंकपुरी टांडा गांव में महिला को दो बार तत्काल तीन तलाक का दंश झेलना पड़ा। वह बताती है कि उसका निकाह साढ़े चार साल पहले मुहम्मद फरमान के साथ हुआ था। आरोप है कि पति शक करने लगा और मारपीट करता था। दो साल पहले तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया।

महिला का जेठ के साथ हलाला कराया गया। उसके बाद पति के साथ दोबारा निकाह हुआ, लेकिन पति ने 17 सितंबर को उसे बेल्ट से पीटा और फिर तीन तलाक दे दिया। महिला की शिकायत पर पति और जेठ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर लिया।

Posted By: Navodit Saktawat

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