नई दिल्ली। मोदी सरकार को मंगलवार उस समय बड़ी कायमाबी मिली जब तीन तलाक बिल राज्यसभा में भी पास हो गया। पहले कहा जा रहा था कि भाजपा चाहे लोकसभा में बिल पास करवा ले, लेकिन राज्यसभा में उसके पास बहुमत नहीं है, लेकिन पार्टी का फ्लोर मैनेजमेंट गजब रहा और बिल पास हो गया। जानिए भाजपा कैसे विपक्षी किलो में सेंध लगाने में कामयाब रही -

  • जदयू और अन्नाद्रमुक को छोड़ राजग खेमा विधेयक को पारित कराने के लिए लगभग पूरी संख्या में सदन में मौजूद था। कांग्रेस, सपा, राकांपा, तृणमूल कांग्रेस, राजद, द्रमुक आदि विपक्षी खेमे के दलों ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया।
  • जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने विचारधारा के आधार पर तत्काल तीन तलाक विधेयक का विरोध करते हुए पार्टी के छह सांसदों के साथ वॉकआउट किया।
  • मगर सरकार ने इसकी भरपाई टीडीपी, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और बसपा सांसदों की वोटिंग से अनुपस्थित के जरिये न केवल पूरी कर ली बल्कि संख्या बल में विपक्षी खेमे को पूरी तरह मात दे दी।
  • छह सांसदों वाली टीआरएस सैद्धांतिक रूप से इसके खिलाफ थी मगर सदन की चर्चा और वोटिंग से अनुपस्थित रहकर सरकार की राह आसान की। टीडीपी के दो सांसदों में से एक सदन में ही नहीं आए तो दूसरे सदस्य भी वोटिंग से गैरहाजिर रहे।
  • राजग की सहयोगी अन्नाद्रमुक ने बिल का विरोध किया मगर उसके 11 सदस्यों ने वोटिंग से पहले ही वॉकआउट कर सरकार की मदद की। वाईएसआर कांग्रेस के दो में से एक सदस्य ही बिल के खिलाफ वोटिंग में मौजूद रहा, दूसरा सदस्य संसद में होते हुए भी वोटिंग से गैरहाजिर रहा।
  • बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए विधेयक का विरोध किया, लेकिन रणनीतिक रूप से उनके समेत बसपा सांसदों ने वोटिंग से अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद की और विपक्ष को झटका दिया। सपा के सुरेंद्र नागर भी वोटिंग के समय सदन में मौजूद नहीं थे।
  • राकांपा के दो वरिष्ठतम नेता शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल सदन में आए ही नहीं हालांकि उनके बाकी दो मौजूद सदस्यों ने विरोध में विपक्ष के साथ मत डाला। इसी तरह, विपक्ष के साथ खड़े होने वाले मनोनीत सदस्य केटीएस तुलसी भी सदन से अनुपस्थित रहे। महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के दो सदस्य भी वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं थे।
  • इस तरह विपक्षी खेमे में सेंध लगाने के साथ ही कई पार्टियों को वोटिंग से गैरहाजिर रहने के लिए मनाकर मोदी सरकार ने राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत का वर्चस्व तोड़कर ऐतिहासिक तीन तलाक विधेयक पारित करा लिया। पिछले तीन-चार दिनों में यह दूसरी बार हुआ है कि संख्या बल में भारी विपक्ष राज्यसभा में भी पटकनी खा रहा है। इससे पहले आरटीआइ संशोधन विधेयक के वक्त भी विपक्ष को झटका लगा था।

दिनभर लगता रहा हिसाब-किताब : तत्काल तीन तलाक के खिलाफ सरकार को तीसरी बार में सफलता मिली है। इससे पहले दो बार विपक्ष ने राह रोक ली थी। यही कारण है कि मंगलवार को पूरे दिन चर्चा से लेकर वोटिंग तक हर किसी की नजर हाजिर और गैरहाजिर होने वाले सांसदों पर ही टिकी थी। हर दल के बयान और हावभाव पढ़े जा रहे थे और दोनों ओर हिसाब-किताब लगाया जा रहा था। सरकार के मंत्री और सदस्य काफी सक्रिय थे।

Posted By: Arvind Dubey

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