मल्टीमीडिया डेस्क। तीन तलाक के जिन्न को एक बार फिर बोतल से बाहर निकालने की मोदी सरकार ने तैयारी कर ली है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि संसद के अगले सत्र में तीन तलाक बिल को पेश किया जाएगा।

इससे पहले पिछली मोदी सरकार के कार्यकाल में तीन तलाक बिल पर अध्यादेश लाया गया था। उस वक्त केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसको समय की ज़रूरत बताया था। उन्होंने कहा था कि लैंगिक न्याय और समानता के लिए ये अध्यादेश लाना ज़रूरी था। उस वक्त इस बिल पर सियासत भी काफी हुई थी। बीजेपी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कांग्रेस को महिला विरोधी बताया था तो कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी के इरादों पर सवाल उठाया था और कहा था कि बीजेपी के लिए यह मामला मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय का नहीं, बल्कि एक राजनीतिक फुटबॉल है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था तीन तलाक को अवैध करार

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2017 लेकर आई थी। यह विधेयक लोकसभा में तो पारित हो गया लेकिन राज्यसभा में बहुमत ना होने से पास नहीं हो पाया था। विधेयक के पास नहीं होने पर सरकार तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ले आई थी।

ऐसे हैं तीन तलाक कानून के प्रावधान

तीन तलाक उस स्थिति में अपराध माना जाएगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी या फिर खून के रिश्तेदारी में कोई शिकायत दर्ज करवाएगा।

तीन तलाक मामले में शौहर को जमानत मिल सकती है, जज पत्नी का पक्ष सुनने के बाद उचित समझे तो जमानत दे सकता है।

महिला और बच्चों के भरण-पोषण की रकम जज के द्वारा ही तय की जाएगी और साथ ही छोटे बच्चों की कस्टडी मां को मिलेगी।

महिला अगर चाहे तो समझौते का विकल्प भी खुला रहेगा और पत्नी की पहल पर समझौता भी हो सकता है।

क्या है तीन तलाक

तलाक़ ए बिद्दत यानी तीन तलाक के तहत जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक़ बोलकर, फ़ोन, मेल, मैसेज या पत्र के ज़रिए देता है तो इसके बाद तुरंत तलाक़ हो जाता है। इसको निरस्त नहीं किया जा सकता है। तीन तलाक को ट्रिपल तलाक, तलाक-ए-बिद्दत, तत्काल तलाक और तालक-ए-मुघलाजाह (अविचल तलाक) के रूप में भी जाना जाता है।

Posted By: Yogendra Sharma