नई दिल्ली। भोजन का अधिकार देने में आनाकानी करने वाले राज्यों को केंद्र की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसे राज्यों को किफायती दर पर अनाज की आपूर्ति रोकी जा सकती है। खाद्य सचिवों की बैठक में केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने सख्त लहजे में कहा कि कानून पर अमल न करने वाले राज्यों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। केंद्र के कड़े रुख को देखते हुए ज्यादातर राज्यों ने मार्च 2015 तक खाद्य सुरक्षा कानून पर अमल करने की हामी भर दी है।

पासवान खाद्य सचिवों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने वाले उन राज्यों को भी फटकार लगाई, जहां अधूरी तैयारियों के साथ हड़बड़ाहट में कानून पर अमल किया गया है। उन्हें भी फरवरी 2015 तक तैयारी पूरी करने की मोहलत दी गई है।

पासवान की कड़ी चेतावनी

बैठक के दौरान पासवान ने सभी राज्यों से सख्त लहजे में कहा कि जितनी तैयारियां होंगी, उसी के हिसाब से खाद्यान्न की आपूर्ति की जाएगी। बाकी के लिए पुरानी प्रणाली के तहत ही अनाज की आपूर्ति होगी, लेकिन मूल्य में रियायत देना संभव नहीं होगा। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भुगतान करना होगा।

राज्यों को अब उपभोक्ताओं की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराना जरूरी है। समूची प्रणाली पारदर्शी बनाई जाएगी। बिहार में खाद्यान्न वितरण प्रणाली की खामियों पर नाखुशी जताते हुए पासवान ने कहा कि राज्य में अभी भी एक करोड़ से अधिक लोगों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध नहीं हो रहा है। जबकि केंद्र से पर्याप्त अनाज की आपूर्ति की जा रही है।

कई राज्यों में तैयारी नहीं

कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने के लिए जरूरी ढांचागत तैयारियों का अभाव है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानें, कंप्यूटरीकरण, उपभोक्ताओं की पहचान, राशन कार्ड का वितरण, एफसीआइ के गोदाम से राशन दुकानों तक खाद्यान्न की आपूर्ति समेत ढेर सारी तैयारियां अधूरी हैं। उत्तर प्रदेश जैसे भारी-भरकम राज्य ने अपने 75 में से केवल 64 जिलों में ही तैयारी पूरी होने की बात कबूली है। इन जिलों में मार्च तक कानून को लागू किया जा सकता है।

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