Vindhyavasini Corridor: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज मां विंध्यवासिनी देवी कॉरीडोर का शिलान्यास करेंगे। इस दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वहां मौजूद रहेंगे। गंगा नदी के किनारे विंध्य की पहाड़ियों में बसा विंध्यधाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। अब यहां कॉरिडोर का विकास होने जा रहा है। इससे यहां की खूबसूरती और बढ़ जाएगी। इसके लिए पर्यटन विभाग ने 130 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की है।

अमित शाह आज इस कॉरिडोर का शिलान्यास करने के अलावा कुछ परियोजनाओं का लोकार्पण भी करेंगे। पर्यटन विभाग की कार्ययोजना के तहत मंदिर परकोटा का निर्माण, परिक्रमा पथ का निर्माण, सड़क एवं मुख्य द्वार का सुदृढ़ीकरण एवं सुंदरीकरण, मंदिर की गलियों के फसाड ट्रीटमेंट का निर्माण कार्य, मां विंध्यवासिनी मंदिर को जाने वाले मार्गों को जोड़ने वाले पहुंच मार्गों का सुदृढ़ीकरण एवं निर्माण, विंध्याचल मेला परिक्षेत्र में पार्किंग, शॉपिंग सेंटर और अन्य यात्री सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

13.14 करोड़ रुपये की लागत से बना रोप-वे

विंध्य क्षेत्र में मां अष्टभुजा और मां कालीखोह मंदिर पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। यहां आने-जाने में श्रद्धालुओं को परेशानी होती थी। इसे देखते हुए यूपी सरकार ने 13.14 करोड़ रुपये की लागत से रोप-वे का निर्माण कराया है। मां अष्टभुजा मंदिर में 296 मीटर लंबा रोप-वे बनाया गया है, जो 47 मीटर की ऊंचाई पर ले जाता है। वहीं मां कालीखोह मंदिर में रोप-वे 167 मीटर लंबा है, जो 37 मीटर की ऊंचाई तक ले जाता है।

रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

विंध्यधाम में पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने के साथ ही क्षेत्र का विकास भी होगा। निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिलेगा और सुंदरीकरण के बाद सुविधा और सुरक्षा का बेहतर माहौल मिलने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इसके अलावा ये पर्यटक ज्यादा दिन तक विंध्यधाम में रहना पसंद करेंगे। इससे होटल और बाकी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। विंध्यधाम में एक ओर विंध्य पर्वत श्रृंखला है और दूसरी ओर ऐतिहासिक किलों-भवनों, गुफाओं, भित्तिचित्रों, शैलाश्रयों, अति प्राचीन जीवाश्मों, मनोरम वन्यजीवन और झरने प्राकृतिक रूप से इसे बेहद सुंदर बनाते हैं।

आस्था का केन्द्र भी है विंध्यधाम

विंध्यधाम देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि सृष्टि का आरंभ होने के पहले ही यह शक्तिपीठ स्थापित हुई थी और प्रलय के बाद भी यह यहीं रहेगी। यहां जगतजननी देवी के तीन रूपों के दर्शन मिलते हैं। त्रिकोण यंत्र पर स्थित विंध्याचल निवासिनी देवी लोकहिताय महालक्ष्मी, महाकाली तथा महासरस्वती का रूप धारण करती हैं।

मां विंध्यवासिनी की वजह से खास है विंध्यांचल

विंध्याचल दुनिया का एक मात्र ऐसा स्थान है जहां देवी के पूरे विग्रह के दर्शन होते हैं। पुराणों में विंध्य क्षेत्र को तपोभूमि कहा गया है। नवरात्र में यहां लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। यह क्षेत्र कजली के लिए भी प्रसिद्ध है। इसे माँ कजला देवी के साथ जोड़ कर देखा जाता है। विंध्यवासिनी देवी के मंदिर में झरोखों से दर्शन कर कजली टीका लगाने की परंपरा आज भी कायम है।

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Shah, Yogi to lay the foundation of Vindhyachal corridor project

Posted By: Arvind Dubey