West Bengal: पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को राज्य स्थित विश्वविद्यालयों का चांसलर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। देशभर में अपनाई जाने वाली वर्तमान प्रणाली के अनुसार गवर्नर को प्रदेश सरकार द्वारा संचालित यूनिवर्सिटीज के कुलाधिपति के रूप में नियुक्त किया जाता है। कुलपतियों की नियुक्ति के लिए कुलाधिपति जिम्मेदार होते हैं। वह कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय होते हैं। हालांकि इस बदलाव को करने के लिए राज्य सरकार को विधानसभा में एक बिल पास करना होगा। वह मौजूदा कानून में बदलाव करना होगा। लागू होने के लिए विधेयक को अधिनियम बनने से पहले राज्यपाल से सहमति लेनी पड़ती थी।

तमिलनाडु सरकार ने भी कानून में किया बदलाव

बता दें यह प्रणाली पहली बार 2010 में पुंची आयोग द्वारा प्रस्तावित की गई थी। तमिलनाडु में भी एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने राज्य विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) अधिनियम 2022 और चेन्नई विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम 2022 के बीच संघर्ष के बाद 25 अप्रैल को कुलपति की जगह सरकार के साथ प्रतिस्थापित किया था। पिछले महीने स्टालियन ने कहा था कि गुजरात सरकार भी राज्य आधारित यूनिवर्सिटीज में कुलपति नियुक्त करने की शक्ति रखती है।

सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद

केरल में भी ऐसी ही एक घटना हुई। जब सरकार ने स्वेच्छा से चांसलर के पदों को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि बंगाल में इसे सत्ता संघर्ष के रूप में माना जा रहा है। राज्य के संवैधानिक प्रमुख बनने के बाद से ही ममता सरकार और राज्यपाल के बीच गतिरोध जारी है।

भर्ती घोटाले में आया हाईकोर्ट का फैसला

वहीं हाल ही में हाईकोर्ट ने ममता कैबिनेट में भर्ती घोटाले में पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री के खिलाफ आदेश दिया है। इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत ने मंत्री की बेटी की नियुक्ति को समाप्त कर दिया। जिसे कथित तौर पर WB SSC भर्ती प्रक्रिया पर उनके प्रभाव के कारण नियुक्त किया गया था।

Posted By: Navodit Saktawat

  • Font Size
  • Close