West Bengal: पश्चिम बंगाल के हावड़ा के रहने वाले 70 वर्षीय तपन दत्ता और 54 साल की रूपा दत्ता जुड़वा बच्चों के माता-पिता बने। बुजुर्ग दंपत्ती ने साल 2019 में अपने इकलौते बेटे को एक ट्रेन हादसे में खो दिया था। तभी से वे अकेलापन महसूस कर रहे थे। इसी से निजात पाने के लिए पेरेंट्स बनने की ख्वाहिश जगी, लेकिन उम्र साथ नहीं दे रही थी। दत्ता दंपती ने हार नहीं मानी और घर में फिर किलकारियां गूंज उठी।

फूल बरसाकर नन्हें सदस्यों का स्वागत

तपन और रूपा ने डॉक्टर से संपर्क किया। चिकित्सकीय परामर्श व निरीक्षण में जुड़वा बच्चों (बेटा-बेटी) के माता-पिता बने। घरवालों ने फूल बरसाकर व शंख बजाकर नन्हें सदस्यों का स्वागत किया।

उम्मीद छोड़ दी थी

तपन ने कहा कि हमारे इकलौते बेटे अनिंद्य की 2019 में एक ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। तब से जिंदगी में खालीपन महसूस कर रहे थे। जिसे भरने के लिए एक सहारे की जरुरत थी। हमने दोबारा पेरेंट्स बनने का फैसला किया। इस बारे में डॉक्टरों से परामर्श किया।

शारीरिक दिक्कतों का करना पड़ा सामना

तपन दत्ता ने कहा, 'डॉक्टर्स का कहना था कि इस उम्र में मेरी पत्नी के लिए गर्भधारण करना जोखिम भरा है।' हम फिर हावड़ा जिले के बाली इलाके के एक डॉक्टर से मिले। उनके परामर्श व मेडिकल निरीक्षण से हम फिर से माता-पिता बन गए। दत्ता ने आगे बताया कि मेरी पत्नी को प्रेगनेंसी के दौरान शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, लेकिन दृढ़ निश्चय और मानसिक बल से सभी तकलीफ दूर हो गई।

Posted By: Kushagra Valuskar

  • Font Size
  • Close