Nuclear Attack: दुनिया के बड़े देशों के बीच जब भी तनाव बढ़ता है तो एक ही बात की आशंका हर किसी के मन में उठती है और वह है न्यूक्लियर अटैक की... यानी Nuclear Bomb की। हर शख्स कम से कम एक बार तो खुद से पूछता ही है कि क्या होगा यदि मेरे शहर में Nuclear Bomb से हमला हुआ? यह जानकारी अहम हो जाती है कि यदि ऐसी स्थिति बनती है तो बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। आसमान में यदि Nuclear Bomb फटा है तो इसके घातक रेडियो एक्टिव पार्टिकल्स को जमीन तक पहुंचने में चंद मिनट का समय लगता है।

अमेरिका में रॉयल सोसायटी मैथेमेटकिल एंड फिजिकल साइंसेस मैग्जीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सलाह दी जाती है कि Nuclear Bomb की स्थिति में लोग तत्काल ईंट और सीमेंट से बनी इमारतों में शरण ले लें। कमरे या हॉल के बीचों-बीच खड़े रहें। खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें। यदि बेसमेंट है तो वहां चले जाएं। रेडियोएक्टिव पार्टिकल का असर कम होगा।

बेसमेंट में छिपने से रेडिएशन से बहुत हद तक बचा जा सकता है। वहीं यदि सामान्य फ्लैट में छिपे तो आधे रेडिएशन का शिकार हो जाएंगे। परमाणु हमले के समय भागने या कार ड्राइव करने की गलती कभी न करें। कार में तो भूल कर भी न छिपें। यह समझने की भूल न करें या ग्लास या धातू का कवच आपको बचाएगा।

युद्ध की आशंका में घर से आसपास सुरंग बनाई जा रही है, लेकिन ध्यान रहे कि छिपने के ऐसे स्थान 5 मिनट से ज्यादा दूरी पर नहीं होना चाहिए।

परमाणु हमले के दौरान कुछ काम नहींं करना चाहिए जैसे कंडिशनर से बाल साफ करना। इससे बालों में रेडिएशन का खतरा बढ़ जाता है। कंडिशनर रेडियो एक्टिव पार्टिकल्स को बांधने का काम करता है। यदि ऐसी स्थिति में फंस गए हैं जहां कहीं छिपना संभव नहीं है तो जमीन पर लेट जाएं।

क्या होता है जब Nuclear Bomb गिरता है

एक Nuclear Bomb जमीन से टकराता है तो फुटबॉल मैदान के आकार के बराबर हिस्से पर अग्नि वर्षा करता है। वहीं इससे निकलने वाले धूल या नमक के आधार के पार्टिकल 100 मील प्रति घंटे की गति से उड़ते हैं और रेडियोएक्टिव पार्टिकल को बिखेर देते हैं। इस दौरान तेज रोशनी निकलती है। लोग कुछ देर के लिए अंधे हो जाते हैं। परमाणु हमले के बाद रेडियोएक्टिव राख और धूल गिरती है। इसे फॉलआउट कहा जाता है। इसके बाद काला धुआं निकलता है और पूरे आसमान में छा जाता है।

Posted By: Arvind Dubey

fantasy cricket
fantasy cricket