क्रांतिकारी Chandra Shekhar Azad की वीरता के किस्से तो देश ने खूब सुने हैं, किंतु उनके व्यक्तित्व में कई खूबियां ऐसी भी थीं, जिनक बारे में इतिहास ने ज्यादा कुछ लिखा नहीं। मसलन, लक्ष्य के प्रति उनके समर्पण और मन में किसी तरह का भटकाव न लाने के उनके किस्से कभी चर्चा में नहीं आए। ऐसा ही एक किस्सा है जब Chandra Shekhar Azad ने एक अन्य क्रांतिकारी साथी सुखदेव को 'आजादी के लक्ष्य के प्रति डटे रहने के लिए" अनूठे अंदाज में सीख दी थी। क्रांतिकारियों के बीच पंडितजी के नाम से मशहूर Chandra Shekhar Azad की प्रचंड देशभक्ति के सामने एक ही लक्ष्य था भारत की आजादी। उनके लिए मानो व्यक्तिगत जीवन का तो कोई मोल था ही नहीं।

Chandra Shekhar Azad हमेशा वीर धनुर्धर अर्जुन की तरह अपना पूरा ध्यान इसी एक बात पर लगाए रहते थे कि कैसे अंग्रेजों से आजादी प्राप्त की जाए। भारत मां को आजाद करवाने के लिए उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना भी की थी।

शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारी इसके सदस्य बने। यह किस्सा उन दिनों का है जब भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और बटुकेश्वर दत्त भी इलाहाबाद में प्रवास पर थे। उन दिनों पंडितजी सहित ये सभी क्रांतिकारी एक कमरे में रहते और क्रांति की योजनाएं बनाते रहे।

इसी बीच एक दिन सुखदेव कहीं से एक कैलेंडर ले आए, जिस पर किसी महिला की मनमोहक तस्वीर छपी थी। सुखदेव को कैलेंडर अच्छा लगा था, इसलिए उन्होंने उसे लाकर कमरे की दीवार पर टांग दिया और बाद में बाहर चले गए।

उनके जाने के बाद जब पंडितजी वहां पहुंचे तो कैलेंडर को देखकर उनकी भृकुटि तन गई। उनका गुस्सा देख वहां मौजूद अन्य साथी डर गए। वे सब पंडितजी का मिजाज जानते थे। पंडितजी ने किसी से कुछ नहीं कहते हुए कैलेंडर उतारा और फाड़कर फेंक दिया।

कुछ समय बाद सुखदेव वापस आए तो दीवार पर कैलेंडर न देखकर इधर-उधर खोजने लगे। जब उन्हें उसके फटे हुए अवशेष दिखाई दिए तो वे गुस्सा हो गए।

वे भी गर्म मिजाज के व्यक्ति थे। उन्होंने गुस्से में सबको ललकारा कि किसने उनके लाए कैलेंडर की यह दशा की है? पंडित जी ने शांत स्वर में उनसे कहा, हमने किया है? सुखदेव थोड़ा कसमसाए परंतु पंडितजी के सामने क्या बोलते, सो धीरे से बोले कि अच्छी तस्वीर थी।

तब पंडितजी ने सुखदेव को समझाया कि ऐसे किसी भी आकर्षण से लोगों का ध्यान लक्ष्य से भटक सकता है। सुखदेव इशारा समझ गए और अपने इस कृत्य पर अफसोस जताते हुए खेद प्रकट करने लगे।

Posted By: Arvind Dubey