हासन, कर्नाटक। पहली बार जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थों में से एक कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में होने वाले महामस्तकाभिषेक की कमान एक महिला के हाथ में होगी। ये हैं सत्तर साल की सरिता जैन। महामस्तकाभिषेक 17 से 25 फरवरी के बीच होगा। इससे पहले 87वां महामस्तकाभिषेक 2006 में हुआ था।

ऐसे सरिता जैन ने की तैयारी-

इस बार का महामस्तकाभिषेक इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले हजार सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब एक महिला महामस्तकाभिषेक महोत्सव की कमान संभाल रही है।

- चार बच्चों की दादी सरिता जैन, पिछले दो साल से दिन रात जैन धर्म के इस आयोजन को सफल बनाने के काम में जुटी हुई हैं, इसमें लाखों की संख्या में जैन धर्म मानने वाले अनुयायी पहुंचेंगे।

-सरिता खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि इतने बड़े आयोजन की कमान उन्हें सौंपी गई हैं। उनके मुताबिक वो लंबे वक्त से इस आयोजन को सफल बनाने के काम में जुटी हुई हैं। हर 12 साल में भगवान महाबली की इस अखंड प्रतिमा का अभिषेक होता है, जिसे महामस्तकाभिषेक कहा जाता है।

- सरिता जैन भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की 2016 से अध्यक्ष हैं और प्रसिद्ध जैन मुनि श्री चारुकीर्ति स्वामीजी के निर्देशन में इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के काम में जुटी हुई हैं।

-इस आयोजन से जुड़ी परंपराओं का ध्यान रखने के लिए वो और उनकी टीम इस आयोजन को सफल बनाने के लिए नई तकनीक और सुविधाओं का सहारा लेंगे। इस बार भगवान बाहुबली गोमतेश्वर की 58.8 फीट ऊंची अखंड प्रतिमा का अभिषेक करने के लिए एक अलग तरह का मचान बनाया गया है। इसके अलावा ऊपर पहुंचने के लिए एलिवेटर लिफ्ट लगाए गए हैं। वहीं यहां आने वाले अनुयायियों को परेशानी न हो, इसके लिए अस्थायी टाउनशिप बसाई गई है। वहीं वैज्ञानिक ढंग से कचरा निपटान की व्यवस्था के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था भी की गई है।

समाज से मिल रहा पूरा सहयोग-

सरिता जैन का कहना है कि महिला होने के बाद भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाज उनका पूरा सहयोग कर रहा है। महिला होने के नाते उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ है। खुद पुरुषों की टीम उनके साथ 12 साल बाद होने वाले महामस्तकाभिषेक के आयोजन को सफल बनाने में दिन रात जुटी हुई है।

ऐसे होगा भगवान बाहुबली का अभिषेक-

श्रवणबेलगोला के भट्टारक जगदगुरु स्वस्तीश्री चारुकीर्ति भट्टारकजी के सान्निध्य में होने वाले इस समारोह में विशाल प्रतिमा का अभिषेक श्रद्धालुओं के जयकार के बीच, पवित्र जल, केसर, चंदन, गन्ने का रस, दूध और पुष्पों के कलशों से किया जाएगा। अभिषेक के लिए जर्मन तकनीक का इस्तेमाल कर बड़ा मचान बनाया गया है। इसे बनाने में 11 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसपर एक साथ पांच हजार श्रद्धालु बैठकर भगवान बाहुबली का अभिषेक कर सकते हैं।

जैन धर्म में पहला मोक्षगामी माना जाता है​-

जैन धर्म में भगवान बाहुबली को पहला मोक्षगामी माना जाता है। उनके द्वारा दिखाई गई राह आज भी उतनी ही सार्थक है। जैन धर्म के मुताबिक, भगवान बाहबुली के इंसान के आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए चार सूत्र बताए थए। इसमें अंहिसा, त्याग से शांति, दोस्ती से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है।

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