कोरोना महामारी को रोकने के लिए पूरी दुनिया लड़ाई लड़ रही है। अब इसे काबू पाने के लिए वैक्सीन आ गई है, जो लोगों को लगना शुरू हो गई है। हालांकि कोरोना वैक्सीन लगने के बावजूद कोविड-19 को खत्म नहीं किया जा सकता। बस इसका असर कम होगा। अब कोरोना के दोनों टीके लगाने के बाद बूस्टर डोज लगाने की बात तक कहीं जा रही हैं। तो आइए जानते हैं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट सनराइज हॉस्पिटल कोच्चि के डॉक्टर राजीव जयदेवन का इस विषय पर क्या कहना है।

डॉ. राजीव जयदेवन का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के नाक या गले में कोई वायरस प्रवेश कर जाता है। तो स्मृति कोशिकाएं तुरंत एक्टिव हो जाती हैं और बड़ी मात्रा में एंटीबॉडी उत्पन्न करती हैं। इससे गंभीर बीमारी से बचाव होता है। इस तरह हम स्वाभाविक रूप से प्रोग्राम किए जाते हैं। उन्होंने कहा, हमारी मूल मेमोरी सेल (जो अनिवार्य रूप से स्लीपिंग लाइब्रेरी की तरह होती हैं) समय के साथ सुधरती हैं और भविष्य में चालू होने पर डेल्टा सहित नवीनतम वेरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी उत्पन्न करने में सक्षम होती हैं। यह निर्णायक रूप से सिद्ध हो चुका है।

डॉ. जयदेवन ने कहा कि जिन्होंने कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक प्राप्त की हैं। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि तीसरी खुराक उन्हें गंभीर बीमारी से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगी। इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि 2 खुराक गंभीर कोविड-19 बीमारी से 90% सुरक्षा प्रदान करती हैं, भले ही बाद में हल्का या स्पर्शोन्मुख वायरस संक्रमण हो। उन्होंने कहा कि जो लोग बूस्टर डोज लेते हैं। उनमें कुछ महीनों के बाद उच्च एंटीबॉडी स्तर होंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे गंभीर बीमारी से अधिक सुरक्षित हैं।

Posted By: Navodit Saktawat