आमतौर पर पति और पत्‍नी के बीच झगड़ों के चलते तलाक की नौबत आती है, ऐसे मेंकोर्ट-कचहरी तक मामला पहुंच जाता है। लेकिन एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जिसमें शादी के डेढ़ साल बाद ही पति और पत्‍नी के बीच कोई खटपट नहीं हुई, बावजूद तलाक की नौबत आ गई है। इसकी वजह बहुत हैरान करने वाली है। एक बीवी ने अपने शौहर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बीवी का कहना है कि उसका शौहर बहुत अच्‍छा, शरीफ और नेकदिल है। यही उसका कसूर है। जबसे शादी हुई है, उसने कभी भी ऊंची आवाज़ में बात नहीं की। शादी के 18 महीने हुए हैं। मियां-बीवी के कोई विवाद परिवार के लोगों ने नहीं सुना। इसके बावजूद महिला को न जाने क्या सूझी। न जाने किस बात पर इतनी नाराज हो गई कि शौहर से तलाक की अर्जी शरई अदालत में लगा दी। वजह पूछी तो जवाब दिया कि शौहर कभी झगड़ता नहीं, इसीलिए तलाक चाहिए। सुनने वाले हैरत में पड़ गए। उलमा ने अर्जी को खारिज कर दिया। मामला उत्तर प्रदेश के संभल जिले का है। शरई अदालत से मामला खारिज करने पर बीवी ने मोहल्ले के जिम्मेदार लोगों से पंचायत लगाकर तलाक की मांग की। पूरा वाकया जानने के बाद पंचायत ने भी यह मामला घर पर ही सुलझाने को कहा।

सामान्य तौर पर महिलाओं की शिकायत रहती है कि शौहर झगड़ा करता है। तीन तलाक के कई ऐसे मामले आए कि गुस्सैल पति ने एक झटके में रिश्ता खत्म कर दिया। महिलाओं को उनका हक मिले, इसलिए तीन तलाक पर कानून भी बन गया। मगर, यह मामला एकदम अलग है। अर्जी डालने के बाद शरई अदालत में महिला बोली कि शौहर के ज्यादा प्यार को बर्दाश्त नहीं कर पा रही। वह मुझ पर कभी चिल्लाता नहीं है और न ही उसने मुझे कभी उदास होने दिया। न ही झगड़ता हैं। मैं लगातार ऐसे माहौल से घुटन महसूस कर रही हूं। वह कभी-कभी मेरे लिए खाना पकाता है और घर के काम में मेरी मदद भी करता है। 18 महीने की शादी में हमारा एक बार भी झगड़ा नहीं हुआ।

तरस गई एक झगड़े के लिए

अजीब तर्क देते हुए महिला बोली कि मैं एक झगड़े के लिए तरस रही हूं। मैं कोई गलती करूं तो वह हमेशा माफ कर देते हैं। मैं उसके साथ बहस करना चाहती हूं। मुझे ऐसी जिदगी नहीं चाहिए, जिसमें मेरा पति मेरी हर बात माने। उससे बार-बार पूछा गया कि कोई अन्य वजह तो नहीं है, मगर वह इसके अलावा कुछ नहीं बोली।

पति ने दी यह दलील

शौहर का कहना है कि वह तो उसे खुश रखना चाहता है। उसकी हर बात मानता है। शरिया अदालत से अपील की कि बीवी का केस वापस कर दिया जाए। शरई अदालत ने मियां बीवी को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए कहते हुए मामला खारिज कर दिया। हालांकि इस बाबत उलमा ने बयान से इन्कार किया।

Posted By: Navodit Saktawat

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