
डिजिटल डेस्क। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले सिगरेट, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पाद आने वाले समय में काफी महंगे हो सकते हैं। केंद्र सरकार इन उत्पादों पर लगने वाले क्षतिपूर्ति सेस की जगह अब नए टैक्स ढांचे को लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस नामक दो नए विधेयक सोमवार को संसद में पेश किए गए।
राजस्व पर पड़ेगा असर
वर्तमान में तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट पर 28% जीएसटी के अलावा क्षतिपूर्ति सेस भी वसूला जाता है। यह सेस अगले साल मार्च में खत्म होने जा रहा है, जिसके बाद सरकार इसे कानूनी रूप से जारी नहीं रख पाएगी। सेस समाप्त होने से राजस्व में कमी आ सकती है।
मशीनों और उपकरणों पर लगेगा सेस
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार एक्साइज संशोधन बिल और नए स्वास्थ्य सुरक्षा सेस कानून की ओर बढ़ रही है। इसका उद्देश्य है,हानिकारक उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना और उनकी खपत घटाना। नए सेस के तहत सिगरेट और पान मसाला तैयार करने वाली मशीनों और उपकरणों पर भी टैक्स लगाया जाएगा।
लोन की भरपाई भी चुनौती
2017 में शुरू किए गए क्षतिपूर्ति सेस को राज्यों की आर्थिक मदद के लिए पांच साल तक चलना था। महामारी के दौरान सेस संग्रह कम होने पर केंद्र ने राज्यों की सहायता के लिए लोन लिया, जिसकी भरपाई के लिए सेस को जारी रखना पड़ा। अब यह सेस सिर्फ मार्च तक ही लागू रह पाएगा।
वर्तमान व्यवस्था
22 सितंबर से लागू जीएसटी के नए संस्करण में क्षतिपूर्ति सेस सिर्फ पान मसाला और तंबाकू जैसे उत्पादों पर ही वसूला जा रहा है। मार्च के बाद कानूनी रूप से इन पर भी यह सेस नहीं लग सकेगा। यह नया कानून सेंट्रल एक्साइज एक्ट 1944 की जगह लेगा।
टैक्स दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव
पुराने कानून में सिगार पर 12% या 1000 पीस पर 4006 रुपये टैक्स लगता था। इसे बढ़ाकर 25% या 5000 रुपये करने का प्रस्ताव है।
65 एमएम सिगरेट पर 1000 पीस पर 440 रुपये टैक्स लगता है, जिसे बढ़ाकर 3000 रुपये करने की तैयारी है।
65 से 70 एमएम की फिल्टर सिगरेट पर 440 रुपये की जगह 5200 रुपये टैक्स प्रस्तावित है।
70 एमएम से बड़ी सिगरेट पर 545 रुपये की जगह 7000 रुपये टैक्स का सुझाव है।
एक्साइज संशोधन बिल क्यों जरूरी
फिलहाल तंबाकू उत्पाद जीएसटी और एक्साइज दोनों के दायरे में आते हैं। क्षतिपूर्ति सेस हटने पर इन पर टैक्स स्वतः कम हो जाएगा। इसी कमी की भरपाई और टैक्स स्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए नया एक्साइज संशोधन बिल और स्वास्थ्य सुरक्षा सेस लागू किया जाएगा।
सितंबर में जीएसटी के 28% स्लैब को हटाकर 40% किया गया है, लेकिन तंबाकू-पान मसाला अभी भी 28% स्लैब में ही हैं। इन्हें 40% वाले वर्ग में कब लाना है, इसका निर्णय जीएसटी काउंसिल की चेयरमैन वित्त मंत्री लेंगी।
उत्पादन क्षमता पर भी लगेगा सेस
नए नियम में सेस मशीन की उत्पादन क्षमता के आधार पर लगेगा। यानी यदि मशीन की क्षमता 100 यूनिट की है और उत्पादन 50 यूनिट भी हो, तो भी सेस 100 यूनिट का ही देना होगा। एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से राज्यों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि इसमें राज्यों की हिस्सेदारी शामिल होती है।