लखनऊ। प्रदेश में असलहा तस्करों के अंतर्राज्यीय नेटवर्क की जड़ें निरंतर मजबूत हो रही हैं। तस्करों और उनके आकाओं ने इस धंधे की बागडोर महिलाओं के हाथ में सौंप दी है। बड़े तस्कर विभिन्न इलाकों में महिला एजेंट तैयार कर कंट्री मेड (देसी) और फैक्ट्री मेड (विदेशी) असलहों की खेप ठिकानों पर भेज रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जरायम पेशा और पश्चिम के सांप्रदायिक उपद्रव में इन असलहों का इस्तेमाल हो रहा है।

मेरठ के लिसाड़ी थाना क्षेत्र और तीरगरान में हुए सांप्रदायिक बवाल में असलहों का जमकर प्रयोग हुआ था। 20 जून को मेरठ की ब्रह्मापुर पुलिस को तस्करों के बारे में मुखबिर से सूचना मिली। पुलिस ने कार्रवाई की तो उसके होश उड़ गए। असल में धंधे की कमान समर गार्डन इलाके की रहने वाली महिला शबनम ने संभाल रखी थी, जिसे लोग रिवाल्वर रानी के नाम से जानते हैं। इसके पास से तीन पिस्टल बरामद हुई। असलहों की तस्करी में शबनम कोई नया चेहरा नहीं है।

इस धंधे में अरसे से महिलाओं का इस्तेमाल हो रहा है और वह घरेलू सामानों के बीच असलहे छिपाकर आसानी से गंतव्य तक पहुंच जाती हैं। पाकिस्तान से आ रही समझौता एक्सप्रेस के जरिये असलहों की तस्करी करने वाले छह लोग मार्च में पकड़े गए थे। अटारी बॉर्डर पर पकड़े गए इन तस्करों के पास से 11 पिस्टल बरामद की गई। मीट मिक्सिंग मशीन में छिपाकर लाए जा रहे इन असलहों की तस्करी का नेतृत्व मुजफ्फरनगर की शहनाज बेगम और राबिया कर रही थीं। उन दिनों मुजफ्फरनगर दंगों की आग से उबर रहा था।

बिहार, मध्यप्रदेश और अन्य क्षेत्रों में कंट्री मेड पिस्टल, रिवाल्वर, एके 47 आदि की भी तस्करी हो रही है। इस धंधे में घरेलू महिलाओं से लेकर लड़कियां तक काम कर रही हैं। पुलिस की नजर पड़ गई या सटीक मुखबिरी हुई तो पकड़ी गईं, वरना इनकी गतिविधियों की कानों-कान खबर भी नहीं होती है।

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