नई दिल्ली। देश में बढ़ती असहिष्णुता और खराब होते सांप्रदायिक माहौल के खिलाफ साहित्यकारों का विरोध बढ़ता जा रहा है। कन्नड़ लेखक और तर्कवादी विचारक एमएम कलबर्गी की हत्या पर साहित्य अकादमी की चुप्पी के विरोध में रविवार को आधा दर्जन और साहित्यकारों ने अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की।

गुजराती लेखक गणेश देवी, अंग्रेजी के कथाकार अमन सेठी, कन्नड़ के कुम वीरभद्रप्पा और पंजाबी भाषा के गुरबचन भुल्लर, अजमेर सिंह औलख व आत्मजीत सिंह ने अकादमी की चुप्पी पर सवाल उठाया है।

इसके बाद सोमवार को लेखक, संपादक और हिन्दी कवि मंगलेश डबराल के साथ ही राजेश जोशी ने भी अपने पुरस्कार लौटा दिए।

इन लेखकों ने अकादमी से अपने सदस्य कलबर्गी और अन्य तर्कवादियों की हत्या तथा दादरी कांड के मद्देनजर सांप्रदायिक माहौल के खिलाफ अपना बयान जारी करने की मांग की है।

भुल्लर ने कहा कि वह देश के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिशों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि वह देश में बनाए जा रहे सांप्रदायिक माहौल को लेकर बहुत परेशान हैं। केंद्र सरकार एक धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक देश के प्रतिनिधि के तौर पर अपना कर्तव्य नहीं निभा रही है। उधर, श्रीनगर में कश्मीरी विद्वानों की एक संस्था ने अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले प्रख्यात लेखकों के साथ एकजुटता जाहिर किया है।

संस्था के अध्यक्ष सुजात बुखारी ने अकादमी से बढ़ते सांप्रदायिक उन्माद पर अपनी चुप्पी तोड़ने को कहा। इससे पहले इसी मुद्दे पर उदय प्रकाश, नयनतारा सहगल, अशोक वाजपेयी और सारा जोसेफ अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं।

कन्नड़ लेखक ने सामान्य परिषद से त्यागपत्र दिया

जानेमाने कन्नड़ लेखक डॉ. अरविंद मालगट्टी ने एमएम कलबर्गी की हत्या पर साहित्य अकादमी की चुप्पी के विरोध में इसकी सामान्य परिषद से इस्तीफा दे दिया है। बेंगलुरु में अपने त्यागपत्र की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अकादमी को खुलकर ऐसी घटनाओं की निंदा करनी चाहिए। इससे पहले शशि देशपांडे, के. सच्चिदानंदन, पीके परक्कादावु ने अकादमी के अपने पदों से त्यागपत्र दे चुके हैं।

लेखकों की आजादी के पक्ष में साहित्य अकादमी

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कलबर्गी की हत्या के बाद अकादमी द्वारा शोक संदेश जारी न करने का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि विचारधारा के आधार पर किसी भी लेखक की हत्या किए जाने का हम विरोध करते हैं। अकादमी ने कन्नड़ लेखक की हत्या के बाद बेंगलुरु में एक बड़ी शोकसभा का आयोजन किया था।

उन्होंने यह भी कहा कि लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ अकादमी पूरी तरह खड़ी है। अब तक पांच लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है, लेकिन साहित्य अकादमी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अभी लेखक उदय प्रकाश के अलावा किसी भी लेखक का कोई पत्र इस संबंध में प्राप्त नहीं हुआ है।

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